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शंकर दयाल सिंह

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देव का मंदिर

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अटूट श्रद्धा और विशवास का केंद्र - देव का सूर्य मंदिर 06/11/2008 औरंगाबाद 06/नवम्बर/2008/( ITNN )>>>> बिहार के औरंगाबाद जिले के देव स्थित ऐतिहासिक त्रेता युग का पश्चिम मुखी सूर्य मंदिर सदियों से देशी-विदेशी पर्यटकों, श्रद्धालुओं और छठव्रतियोंकी अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। पुरातत्वविदइस मंदिर का निर्माणकालआठवींशताब्दीके आसपास बताते हैं, लेकिन मंदिर की अभूतपूर्व स्थापत्य कला, शिल्प, कलात्मक भव्यता और धार्मिक महत्ता के कारण ही जानमानसमें यह किंवदतीप्रसिद्ध है कि इसका निर्माण देवशिल्पीभगवान विश्वकर्मा ने स्वयं अपने हाथों से किया है। देव स्थित भगवान भास्कर का विशाल मंदिर अपने अप्रतिम सौंदर्य और शिल्प के कारण सदियों से श्रद्धालुओं, वैज्ञानिकों, मूर्ति चोरों व तस्करों व आमजनोंके लिए आकर्षण का केंद्र है। काले और भूरे पत्थरों की अतिसुंदरकृति जिस तरह उडीसा प्रदेश के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का शिल्प है, ठीक उसी से मिलता-जुलता शिल्प देव के प्राचीन सूर्य मंदिर का भी है। मंदिर के निर्माणकालके संबंध में उसके बाहर ब्राह्मीलिपि में लिखित और संस्कृत में अनुव

तथागत अवतार तुलसी

Thursday, April 7, 2011 तथागत अवतार तुलसी से एक मुलाकात/ तथागत अवतार तुलसी से एक मुलाकात अनामी शरण बबल मुबंई के बोरीवली रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद पवई होते कांजुरमार्ग जाते समय एकाएक मेरी नजर आईआईटी कैम्पस की तरफ गई। देखते ही मुझे तथागत अवतार तुलसी की याद आई। वही अवतार तुलसी जिसने सबसे कम उम्र में दसवी की परीक्षा में पास होने के बाद सीधे स्नात्तक करके एक रिकार्ड बनाया था। एमए किए बगैर ही तथागत ने पीएचडी करके डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। बाद में बेंगलुरू और अमरीका के न्यूजर्सी और कनाडा के कई यूनिवर्सिटी में रिसर्च फेलोशिप के साथ साथ विजीटिंग प्रोफेसर   के रूप में काम किया। सबसे कम उम्र में नोबल पुरस्कार पाने की हसरत रखने वाले अवतार तुलसी को पिछले साल ही आईआईटी मुंबई में दुनिया में सबसे कम उम्र का लेक्चरर होने का मौका मिला था। मुंबई में पहुंचे मुझे दो घंटे भी नहीं हुए थे कि अवतार से मिलने की इच्छा प्रबल हो गई। हूमा मल्टीप्लेक्स के पास जहां मैं ठहरा था वहां से आईआईटी मुंबई नजदीक नहीं होता तो शायद अवतार से मेरी मुलाकात भी नहीं हो पाती। अवतार तुलसी के पापा प्रोफेसर तुलसी नारायण प्रसाद