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मंगल स्नेह..और अन्य कविताएं .

अनंत हो आयुष सा अपना गगन जिसमें हो आकांक्षा (ओ) की ऊंची उडान लगन रहे मगन रहो दिल मे अगन रहे अपनी प्रतिभा के संग करो न्याय और उर्जा का हो सटीक इस्तेमाल और जमाना है अब विज्ञान का भावनाओं से अधिक   तकनीक पर हो यकीन उस पर ही करना होगा अब भरोसा तभी सबकुछ होग हासिल लाख हो जटिल रास्ता अंतत मिलेगी ही अपनी मंजिल ।। अपना राास्ता  अपनी जीत ।। नूरानी चांद सा चेहरा नूरानी चांद सा चेहरा,सबों को भाता है कोई मम्मा कोई चंदा तो कोई मामा बुलाता है। कोमल शीतल पावन उजास सबों का अपना है निर्मल आंखों का एक सपना है सूरज सा तेज अगन तपिश नहीं बादल सा मनचला   बेताब नहीं हवाएं मंद मंद सबकी जरूरत बेताबी बेकाबू रफ्तार नहीं कोमल शीतल पावन प्रकाश से बचपन भी हो जाए बावला ।। नूरानी चांद सा चेहरा ............... सबों के साथ सबका हो जाना ही खास होता है अपना बन बनाने में मोहक सा उल्लास होता है लदे हुए फलदार पेड़ ही सबों को बुलाता है नूरानी चांद सा चेहरा ............... मन की सुदंरता से बढ़कर तेरा चेहरा तन मन की खुश्बू से महकता तेरा चेहरा

प्रेमचंद की लघुकथ देवी

रात भीग चुकी थी। मैं बरामदे में खड़ा था। सामने अमीनुद्दौला पार्क नींद में डूबा खड़ा था । सिर्फ एक औरत एक तकियादार बेंच पर बैठी हुई थी । पार्क के बाहर सड़क के किनारे एक फ़कीर खड़ा राहगीरों को दुआयें दे रहा था - खुदा और रसूल का वास्ता... राम और भगवान का वास्ता - इस अन्धे पर रहम करो । सड़क पर मोटरों और सवारियों का तांता बन्द हो चुका था । इक्के-दुक्के आदमी नजर आ जाते थे । फ़कीर की आवाज जो पहले नक्कारखाने में तूती की आवाज थी, जब खुले मैदानों की बुलन्द पुकार हो रही थी । एकाएक वह औरत उठी और इधर-उधर चौकन्नी आंखों से देखकर फ़कीर के हाथ में कुछ रख दिया और फिर बहुत धीमे से कुछ कहकर एक तरफ़ चली गई । फ़कीर के हाथ में कागज का एक टुकड़ा नजर आया जिसे वह बार-बार मल रहा था । क्या उस औरत ने यह कागज दिया है ? यह क्या रहस्य है? उसको जानने के कुतूहल से अधीर होकर मैं नीचे आया और फ़कीर के पास जाकर खड़ा हो गया । मेरी आहट आते ही फ़कीर ने उस कागज के पुर्जे को उंगलियों से दबाकर मुझे दिखाया और पूछा - बाबा, देखो यह क्या चीज है ? मैंने देखा-दस रुपये का नोट था । बोला- दस रुपये का नोट है, कहाँ पाया