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कुछ मशहूर गजल / Some Famous Ghazlein

Some Famous Ghazlein बशीर बद्र - लोग टूट जाते हैं , एक घर बनाने में बशीर बद्र - इतना मत चाहो उसे , वो बेवफ़ा हो जाएगा बशीर बद्र - मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला बशीर बद्र - ऐ यार मगर तेरी गली तेरी गली है बशीर बद्र - परखना मत , परखने में कोई अपना नहीं रहता मुनव्वर राना - मुहाजिरनामा मुनव्वर राना - मैं लोगों से मुलाकातों के लम्हे याद रखता हूँ मुनव्वर राना - लबो पर उसके कभी बददुआ नहीं होती मुनव्वर राणा - कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता मुनव्वर राणा - मियाँ मैं शेर हूँ शेरों की गुर्राहट नहीं जाती मुनव्वर राना - ये देख कर पतंगे भी हैरान हो गयी मुनव्वर राना - आपका ग़म मुझे तन्हा नहीं रहने देता मुनव्वर राना - अगर दौलत से ही सब क़द का अंदाज़ा लगाते हैं मुनव्वर राना - किसी भी मोड़ पर तुमसे वफ़ादारी नहीं होगी राहत इन्दौरी - लोग हर मोड़ पर रुक - रुक के संभलते क्यों है राहत इन्दौरी - सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे राहत इन्दौरी - रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं राहत इन्दौरी - बुलाती है मगर जाने का नईं राहत इन्दौरी - सुला
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पेशावर के बच्चों के नाम   نيممي نرگيش किसी माँ ने सुबह बच्चे का… डब्बा तैयार किया होगा ! किसी बाप ने अपने लाल को.. खुलते स्कूल छोड़ दिया होगा !! किसे पता था वह .. अब लौटेगा नहीं कभी ! किसे पता था गोलियों से.. भून जायेंगे अरमान सभी !! बच्चो में रब है बसता.. उस रब से मेरी फ़रियाद है !! तालिबान यह कैसा तेरा … मजहब के नाम जिहाद है !! मेमनों की तरह बच्चे… मिमियाए जरूर होंगे ! खौफ से डर कर आँखों में आंसू आये जरूर होंगे !! तुतलाये शब्दों से रहम की... भीख भी तुझसे मांगी होगी ! अपने बचाव को हर सीमाये.. उसने दौड़ कर लांघी होगी !! मासूमो के आक्रन्द से भी न पिघले.. हिम्म्त की तेरे देनी दाद है ! हे आतंकी... यह कैसा तेरा … मजहब के नाम जिहाद है !! भारत से दुश्मनी निभाने… मोहरा बनाया उसने जिसे ! जिस साप को दूध पिलाया.. वही अब डस रहा उसे ! हे आतंक के जन्मदाता…. अब तो कुछ सबक ले ! यदि शरीर में दिल है .. तू थोड़ा सा तो सिसक ले ! आतंक के साये ने हिला दी.. पाकिस्तान की बुनियाद है ! तालिबान यह कैसा तेरा… मजहब के नाम जिहाद है !! कौन धर्म में हिंसा को.. जाय

शिवमूर्ति शिव की मूर्ति सा वंदनीय

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  आपने सुना है शिवमूर्ति को लेखक आलोक परोड़कर / Alok Paradkar प्रस्तुति-- प्रवीण परिमल, प्यासा रुपक बहुत कम ही लेखकों के साथ ऐसा होता है कि वे जितना अच्छा लिखते हैं, उतना ही अच्छा बोलते भी हैं। शिवमूर्ति ऐसे ही रचनाकार हैं। जो पढ़ने बैठिए तो लगता है कि एक ही सांस में पूरा खत्म कर लें और जो सुनिए तो बस सुनते ही चले जाइए। उनका कहा रोचक भी होता है और विचारपूर्ण भी। किस्से-कहानी, लोकगीत-दोहा-चौपाई, कहावतें-मुहावरों का तो विपुल भण्डार है उनके पास । चुटकी और व्यंग्य का खिलंदड़ ा अन्दाज और हंसी-हंसी में बड़ी बात कह देने का कौशल। शनिवार को सुपरिचित साहित्यकार अखिलेश के नए उपन्यास ‘निर्वासन’ पर चर्चा के लिए लखनऊ में आयोजित संगोष्ठी में उनको सुनना हर बार की तरह अविस्मरणीय अनुभव तो रहा। इस बहाने सोशल मीडिया, समकालीन साहित्यिक परिदृश्य, हिन्दी साहित्य पर विदेशी प्रभाव को लेकर उनकी जो टिप्पणियां सुनने को मिलीं वे भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। शिवमूर्ति फेसबुक पर हैं लेकिन फेसबुक पर साहित्य और साहित्यकारों को लेकर चलने वाली बहसों को लेकर उन्होंने अपने खास अन्दाज में कई ब