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हिन्दी के प्रमुख कथाकार

प्रस्तुति-- रीना शरण मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से [ छुपाएँ ] द वा ब हिंदी के प्रमुख कथाकार व उपन्यासकार अमरकांत । अरुण कमल । अरुणा सीतेश । अलका सरावगी । असगर वजाहत । अमृतलाल नागर । आचार्य चतुरसेन शास्त्री । इलाचंद्र जोशी । उदय प्रकाश । उपेन्द्रनाथ अश्क । कमलेश्वर । कामतानाथ । कृष्ण चंदर । कृष्ण बलदेव वैद । कृष्णा सोबती । गिरिराज किशोर । गीतांजली श्री । चित्रा मुद्गल । जयशंकर प्रसाद । दीपक शर्मा । धर्मवीर भारती । निर्मल वर्मा । पांडेय बेचन शर्मा उग्र । प्रताप सहगल । प्रेमचंद । फणीश्वर नाथ रेणु । भगवती चरण वर्मा । भगवानदास मोरवाल । भीष्म साहनी । मन्नू भंडारी । मनोहर श्याम जोशी । ममता कालिया । मैत्रेयी पुष्पा । मोहन राकेश । मृदुला गर्ग । मृदुला सिन्हा । मिथिलेश्वर । यशपाल । रवीन्द्र कालिया । रवीन्द्र प्रभात । रांगेय राघव । राजेन्द्र सिंह बेदी । राजेन्द्र यादव । राहुल सांकृत्यायन । शिवानी । शेखर जोशी । शैलेश मटियानी । स्वदेश दीपक । सत्येन कुमार । सीतेश आलोक । सूर्यबाला । से.रा.यात्री । हृदयेश । ज्ञानरंजन

बिहार की साहित्यिक पत्रकारिता - साहित्य और साहित्यिकार

प्रस्तुति-- प्रियदर्शी किशोर / देवेन्द्र किशोर पत्रकारिता शुरुआती दौर में एक मिशन के रूप में सामने आयी थी लेकिन आज बदलते बाजारवाद संस्कृति के बीच यह शुद्ध रूप से व्यवसाय बन चुका है। तब और अब की पत्रकारिता में काफी बदलाव आ चुका है। फिर भी पत्रकारिता की ताकत को कोई चुनौती नहीं दे सकता और भारतीय प्ररिपेक्ष में तो इसकी भूमिका को भुलायी नहीं जा सकती है। पत्रकार, साहित्यिकार, राजनेता, समाज सुधारक या यों कहे कि अभिव्यक्ति की लड़ाई में शरीक सभी ने इसे हथियार बना कर अपनी आवाज बुलंद की। पत्रकारिता में विविध आयाम शामिल हुये । हर विधा के पत्र-पत्रिकाओं का बड़े पैमाने पर प्रकाशन हुआ बल्कि आज भी हो रहा है। राजनीतिक, सांस्कृतिक, भाषाई, जाति, धार्मिक, खेल, वैज्ञानिक पत्रकारिता एक ओर जहंा अपनी प्रखारता दिखा रही थी वहीं पर साहित्यक पत्रकारिता भी अछूती नहीं रही । शुरू से ही साहित्यिक पत्रकारिता पूरे तेवर के साथ निखरती रही। इस क्षेत्र में सर्वप्रथम भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अपने 'क