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Shivnath Jha shared a photo . पाँच अगस्त को मित्रों से गुजारिश किया था की आप हिंदी साहित्य के धनुर्धरों का नाम यहाँ देखें, अगर कुछ छुट गए हों और आपको उनका नाम स्मरण है, तो इस श्रृंखला में जोड़ें। अब तक लिस्ट पूरा नहीं हुआ है - आप भी योगदान दें - आभार एक गुजारिश- इसे शेयर भी करें, आभारी भारत में "अपनी भाषा हिन्दी" के माध्यम से भारत के जनमानस में साँस फूंकने वाले मूर्धन्य लेखकों, कवियों, कवियेत्रियों के योगदा न पर हम एक श्रृंखला करने जा रहे हैं. अगर आप किन्ही और महा-पुरुषों का नाम इस श्रृंखला में जोड़ेंगे तो आभारी रहूँगा १. भारतेंदु हरिश्चन्द्र २. भवानी प्रसाद मिश्र ३. गोपाल सिंह नेपाली ४. गोपालदास नीरज ५. गुलाब खंडेलवाल ६. हरिवंश राय बच्चन ७. जयशंकर प्रसाद ८. काका हाथरसी ९. केदारनाथ अग्रवाल १०. केदारनाथ सिंह ११. महादेवी वर्मा १२. मैथिली शरण गुप्त १३. माखनलाल चतुर्वेदी १४. अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' १५. जानकी वल्लभ शास्त्री १६. नागार्जुन १७. रामधारी सिंह दिनकर १८. सच्चिदानंद वात्सायन १९. शिवमंगल सिंह सुमन २०. सुभद्रा कुमार

विवाह सम्बन्ध / ब्रह्मर्षि वंश विस्तार /

सहजानन्द सरस्वती यहां जाएं: भ्रमण , खोज मुखपृष्ठ   » रचनाकारों की सूची   » रचनाकार: सहजानन्द सरस्वती    » संग्रह: ब्रह्मर्षि वंश विस्तार हम प्रथम ही सिद्ध कर चुके हैं कि त्यागी, महियाल, पश्‍चिम, भूमिहारादि ब्राह्मण दल सभी देश के कर्मवीर, धनी और प्रतिष्ठित अयाचक ब्राह्मणों का एक दल है, जो उसी समय बना जिस समय कान्यकुब्ज, मैथिल, गौड़, सारस्वत और सर्यूपारी आदि ब्राह्मण दल बन रहे थे। अब इस प्रकरण के अन्त में उसी की पुष्टि के लिए इन अयाचक ब्राह्मणों का प्रतिष्ठित मैथिलों, कान्यकुब्जों, सर्यूपारियों और गौड़ों से विवाह सम्बन्ध दिखलाते हुए इनके श्रेष्ठ ब्राह्मण होने में प्रसिद्ध-प्रसिद्ध पंडित प्रवरों की सम्मतियाँ दिखला कर इस प्रकरण को समाप्त करेंगे। जिनके दिखलाने से बहुतों की अनभिज्ञता मूलक कुकल्पनाएँ समूल विनष्ट हो जावेंगी और उनको अपनी पंडिताई का पता लग जावेगा। उस सम्बन्ध को नाम बनाम दिखलाने से प्रथम ही हम उसके विषय में दो-एक बातें कह दिया चाहते हैं। एक तो यह कि जब काशी में भूमिहार ब्राह्मण महासभा की बैठक हुई थी तभी महाराज द्विजराज काशिराज ने अपनी वक्त्तृता में इस