पोस्ट

फ़रवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मोबाईल पुराण - अनामी शरण बबल

अनामी शरण बबल   मोबाईलडार्लिंग से लेकर कोबरा तक  (1-20 कविताएं ) मोबाईल -1 1-10 सबकी प्यारी मोबाईल डार्लिंग / अनामी शरण बबल   1 हम सब तेरे प्यार में पागल ओए मोबाईल डार्लिंग । तुम बिन रहा न जाए / विरह सहा न जए / मन की बात कहा न जाए तेरे बिन मन उदास / जीवन सूना सूना पल पल / हरपल तेरी याद सताये।।. लगे न तेरे बिन मन कहीं मन मचले मृगनयनी सी / व्याकुल तन, मन आतुर,   चंचल नयनजग सूना बेकार लगे जग बिन तेरे तू जादूगर या जादूगरनी / मोहित सारा जग दीवाना तू बेवफा डार्लिंग ।।   पर कैसे कहूं तुम्हें / तू है बेवफा डार्लिंग   तू पास आते ही / तुम्हें करीब पाते ही अपना लगे / मन खिलखिल जाए रेगिस्तानी मन में बहार आ जाए आते ही हाथ में भर जाए मन विभोर सा हो जाए तन मन पूरा सुकून से शांत तृप्त हो चंचल मन नयन.। तेरे करीब होने से लगे सारा जहां हमारा मुठ्ठी में हो मानो सबकुछ सब मेरे भीतर अपने दायरे में खुद भी लगे सबके साथ सबके बीच करीब   सबसे निकट 2 तू अकेली   मोबाईल डार्लिंग   सारी भीड़ पर है