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वैदिक परिप्रेक्ष्य में यौनिक स्वतंत्रता

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वैदिक परिप्रेक्ष्य में यौनिक स्वतंत्रता अथवा ... यौनिक स्वच्छ्न्दता की तलाश में आधुनिक पाश्चात्यवादी नारी कुंठा [स्त्री-विमर्श] - शिवेन्द्र कुमार मिश्र [इस चर्चा से यह भारतीय हिन्दू दृष्टिकोण स्वत: स्पष्ट है कि भौतिक सुखों के केन्द्र में है - '' नारी और यौन सुख अर्थात सेक्स है। इस प्रकार '' हिन्दू नारी विमर्श '' के लिए नारी की यौन संतुष्टि , उसके यौनाधिकार और उसकी संतानोत्पत्ति का अधिकार केन्द्र में आ जाता है। वेदों , उपनिषदों , आरण्यकों एवं नीति ग्रंथो में इसकी चर्चा है। अथर्ववेद में तो इस पर विस्तृत चर्चा देखी जा सकती है .... ] हम जब भी स्त्री-विमर्श की चर्चा करते हैं तो यह चर्चा स्त्री-पुरूष समानता के चौराहे से चलकर स्त्री की देह पर समाप्त हो जाती है। लैंगिक समानता का अभिप्राय जहां एक ओर पुरूष के साथ काम के अवसरों की समानता से लगाया जाता है वहीं दूसरी ओर उसकी यौनिक आजादी से भी। मेरा मानना है कि स्वतंत्रता की अन्य विधाओं की तरह यौन संबंधी आजादी दिए जाने में भी कोई परहेज नहीं होना चाहिए बशर्तें इस बात का ध्यान रखा जाए कि जहां से मेरी