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*ब्रह्मांड* / दिनेश श्रीवास्तव

 दिनेश-दोहावली /                *ब्रह्मांड* यहाँ सकल ब्रम्हांड का,निर्माता है कौन? तर्कशास्त्र ज्ञाता सभी, हो जाते हैं मौन।।-१ वेदशास्त्र गीता सभी,अलग-अलग सब ग्रंथ। परिभाषा ब्रह्मांड की,देते हैं सब पंथ।।-२ सकल समाहित है जहाँ,पृथ्वी,गगन समीर। वही यहाँ ब्रह्मांड है,बतलाते मति-धीर।।-३ परमब्रह्म को जानिए, निर्माता ब्रह्मांड। बतलाते हमको यही,पंडित परम प्रकांड।।-४ पंचभूत निर्मित यथा,काया सुघर शरीर। काया ही ब्रह्मांड है,जो समझे वह धीर ।।-५ पंचभूत विचलित जहाँ, पाता कष्ट शरीर। इसी भाँति ब्रह्मांड भी,पाता रहता पीर।।-६ ग्रह तारे गैलेक्सियाँ, सभी खगोली तत्त्व। अंतरिक्ष ब्रह्मांड का, होता परम महत्व।।-७ गूँजे जब ब्रह्मांड में,'ओम' शब्द का नाद। सभी चराचर जीव के,मिट जाते अवसाद।।-८ नष्ट न हो पर्यावरण,करें संवरण लोभ। होगा फिर ब्रह्मांड में,कभी नहीं विक्षोभ।।-९ देवत्रयी ब्रह्मांड के,ब्रह्मा,विष्णु महेश। ब्रह्मशक्ति की साधना,करता सदा 'दिनेश'।।-१०                  दिनेश श्रीवास्तव                  ग़ाज़ियाबाद

आज का दिन मंगलमय हो

 प्रस्तुति - कृष्ण  मेहता  🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 22 अक्टूबर 2020* ⛅ *दिन - गुरुवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - दक्षिणायन* ⛅ *ऋतु - हेमंत* ⛅ *मास - अश्विन* ⛅ *पक्ष - शुक्ल*  ⛅ *तिथि - षष्ठी रात्रि 07:39 तक तत्पश्चात सप्तमी* ⛅ *नक्षत्र - पूर्वाषाढा 23 अक्टूबर रात्रि 01:00 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा* ⛅ *योग - सुकर्मा 22 अक्टूबर रात्रि 02:37 तक तत्पश्चात धृति* ⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:48 से शाम 03:14 तक*  ⛅ *सूर्योदय - 06:38*  ⛅ *सूर्यास्त - 18:07*  ⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - सरस्वती पूजन, हेमंत ऋतु प्रारंभ*  💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*                🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *दाँतों में से खून निकलता हो तो* 🌷 🍋 *नीबूं का रस मसूड़ों को रगड़ने से आराम होगा ।* 🙏🏻 *- पूज्य बापूजी Jodhpur 4th Sep, 2011*            🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷 🏡 *किचन में दवाईयां रखने की आदत वास्

अपनों का साथ

 *पिता की चारपाई* पिता जिद कर रहे थे कि उसकी चारपाई गैलरी में डाल दी जाये। बेटा परेशान था। बहू बड़बड़ा रही थी..... कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नहीं देता, हमने दूसरी मंजिल पर ही सही एक कमरा तो दिया.... सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं? निकित ने सोचा पिता कमजोर और बीमार हैं.... जिद कर रहे हैं तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ। पिता की इच्छा पू्री करना उसका स्वभाव भी था। अब पिता की चारपाई गैलरी में आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते। कुछ देर लान में टहलते। लान में खेलते नाती - पोतों से बातें करते , हंसते , बोलते और मुस्कुराते। कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें लाने की फरमाईश भी करते। खुद खाते , बहू - बेटे और बच्चों को भी खिलाते ....धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था। दादा मेरी बाल फेंको... गेट में प्रवेश करते हुए निकित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी तो बेटे को डांटने लगा...  अंशुल बाबा बुजुर्ग हैं उन्हें ऐसे कामों के लिए मत बोला करो। पापा! दादा रोज हमारी बॉल उठाकर फेंकते हैं..

झारखण्ड के पलामू वाला काजर

 #ठेठ_पलामू:- #जड़ी-बूटी और #काजर ------------------------------------------------------- पिछला साल इहे दशहरा टाईम का बात है, भोरे-भोरे उठे तो आदत के अनुसार आँख मइसत उठ के ऐनक देखने गए कि खूबसूरती तनी-मानी बचल है अगुआ लोग के लिए कि सब साफ हो गया। तो अपन चेहरा देख के डेरा गए। पूरा आँख के नीचे करिया हो गया था। जब हाथ से छुए तो पता चला कि काजर लगा हुआ था। फिर याद आया कि #जा_सार_के दशहरा न स्टार्ट हो गया, तो वही माई लगा दी थी। रात में सुतला घरी कि रात के कोई डायन बिसाहिन के नज़र न लगे। अब बड़े हो गए थे, तो सोचे अब न तो बच्चा हैं न ही #सुनर हैं, तो नजर थोड़े लगेगा, पर बात का है न कि माई के लिए बेटा भले 2 लईका के बाप बन जाए, लेकिन उ बच्चा ही रहता है और दुनिया में सबसे सुंदर दिखता है। सो ज़ाहिर सी बात है, नजर से बचाना था तो काजर तो लगाना था। लईका में दशहरा के ठीक एक दिन पहिले बड़की फुआ के ड्यूटी रहता था। एगो थरिया में बालू आऊ करिया कपड़ा सुई डोरा लेके बैठ जाती थी और सब के लिए छोटा-छोटा चरखूँट आकार में कपड़ा के थैली बना-बना के ओकरा में बालू भर के सी देती थी। अब जे बड़हन लईका रहे उ बाँह पर बाँधे, न त

गीत

 *भारत का नया गीत* ×××××××××××××××× *आओ बच्चों तुम्हे दिखायें,  शैतानी शैतान की... ।* *नेताओं से बहुत दुखी है,  जनता हिन्दुस्तान की...।।* *बड़े-बड़े नेता शामिल हैं,   घोटालों की थाली में ।* *सूटकेश भर के चलते हैं,  अपने यहाँ दलाली में ।।* *देश-धर्म की नहीं है चिंता,  चिन्ता निज सन्तान की ।* *नेताओं से बहुत दुखी है,  जनता हिन्दुस्तान की...।।* *चोर-लुटेरे भी अब देखो,  सांसद और विधायक हैं।* *सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये,  सचमुच के खलनायक हैं ।।* *भिखमंगों में गिनती कर दी,  भारत देश महान की ।* *नेताओं से बहुत दुखी है,  जनता हिन्दुस्तान की...।।* *जनता के आवंटित धन को,  आधा मंत्री खाते हैं ।* *बाकी में अफसर ठेकेदार,  मिलकर मौज उड़ाते हैं ।।* *लूट खसोट मचा रखी है,  सरकारी अनुदान की ।* *नेताओं से बहुत दुखी है,  जनता हिन्दुस्तान की...।।* *थर्ड क्लास अफसर बन जाता,  फर्स्ट क्लास चपरासी है, *होशियार बच्चों के मन में,  छायी आज उदासी है।।* *गंवार सारे मंत्री बन गये,  मेधावी आज खलासी है।* *आओ बच्चों तुम्हें दिखायें,  शैतानी शैतान की...।।* *नेताओं से बहुत दुखी है,  जनता हिन्दुस्तान की. *please share in otha

गुड़ुप ! ( लघुकथा )/ सुभाष नीरव

 लेखनी लघुकथा मैरेथन 2020 ================ मित्रो, यू.के. निवासी हिन्दी साहित्यकार और 'लेखनी' पत्रिका की संपादिका शैल अग्रवाल जी  द्वारा प्रारंभ की गई 'लेखनी लघुकथा मैरेथन, 2020' के लिए कल उन्होंने मुझे नामित किया। मैं उनका आभारी हूँ। इसके तहत मुझे पाँच दिन तक प्रतिदिन अपनी एक लघुकथा पोस्ट करनी है और किसी एक लघुकथा लेखक को नामित करना है। आज मेरा पहला दिन है। मैं अपने कथाकार मित्र बलराम अग्रवाल को इस 'लेखनी लघुकथा मैरेथन 2020' के लिए नामित करता हूँ और अपनी एक लघुकथा आपसे साझा करता हूँ। -सुभाष नीरव 5 अक्तूबर 2020 लघुकथा गुड़ुप ! -------- सुभाष नीरव दिन ढलान पर है और वे दोनों झील के किनारे कुछ ऊँचाई पर बैठे हैं। लड़की ने छोटे-छोटे कंकर बीनकर बाईं हथेली पर रख लिए हैं और दाएं हाथ से एक एक कंकर उठाकर नीचे झील के पानी में फेंक रही है, रुक रुककर। सामने झील की ओर उसकी नजरें स्थिर हैं। लड़का उसकी बगल में बेहरकत खामोश बैठा है। "तो तुमने क्या फैसला लिया?" लड़की लड़के की ओर देखे बगैर पूछती है। "किस बारे में?" लड़का भी लड़की की तरफ देखे बिना गर्दन झुकाए पैर