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खो गया है मेरा चांद

    अनामी शरण बबल  मेरा चांद खो गया है मेरी आंखों से आंखो में ही रहता बंद पलक गिराये बगैर हर दम हर पल  साथ जब चाहा तब देख लिया बातें कर ली एकएक किसी अंधड़ के बिना ही कैसी आंधी चली तूफान मचा हो गया कोहराम नहीं दिखता अब नहीं दिखता कोई चांद आंखों से लापत आंखों में लोप हो गया चांद किससे कहूं अपनी कथा -व्यथा   लगता है मानो कहीं मेरी ही निष्ठा में  कोई चूक रह गयी होगी   शायद? मैं तेरा झूठा 1 मान लेना भी अक्सर हैरान कर देता है मुझे बारबार लगता मानो बादलों में परियों के संग खेल रहा बादलों से घिरा मैं अचंभित हो जाता हूं बार बार रेत में फूल खिला हो मानो परियों.से दिल मिला हो मानो जिंदगी पूरी रंगीन हो गयी ऐसा भी होता है यह नहीं सोचा था पाने का स्वप्न पराया लगता है मैं तेरा साया सा कोई ख्वाब पराया नहीं लगता है। 2   करके आंखे बंद जब भी बैठता हूं तेरे ख्याल में लोग बाग इसे ध्यान उपासना मान लेते है। मैं तो कहीं और खोया रहता हूं तेरे ख्याल में केवल होती है संग मेरे तेरा अहसास तेररी रौशन