नखरे किसी के व्यर्थ उठाया न कीजिये





गिरीश पंकज

इन आंसुओं को इस तरह जाया न कीजिये
लोगों के तंज दिल में बसाया न कीजिये
कुछ लोग यही चाहते हैं सब दुखी रहें
उनको कोई भी ज़ख्म दिखाया न कीजिये
जिनसे हमें धोखा मिलें उनसे रहें बच कर
भूले से उनसे हाथ मिलाया न कीजिये
क्या ज़िंदगी का कोई भरोसा भला कहो
इस बात को कभी भी भुलाया न कीजिये
जितने हैं लोग ओछे 'शो-बाज़' है बड़े
नखरे किसी के व्यर्थ उठाया न कीजिये
कब कौन कहाँ आपकी बातों को खोल दे
यूं हालेदिल सभी को बताया न कीजिये
कब कौन-सी लहर उसे ले जाये बहा कर
ऐसे घरोंदे आप बनाया न कीजिये



वायरल  को इस तरह अपने सिर पर चढाया न कीजिे सर

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