गुरुवार, 26 मार्च 2015

विजय मोहन सिंह के प्रति नमन

nt...
दुखद ,.
......
रचनाकार और आलोचक विजय मोहन सिंह नही रहे ,इस बार के दिल्ली पुस्तक मेले से उनकी एक किताब लाया था थोड़ा -सा ही पढ़ पाया ,किताब ख़त्म होने के पहले उनकी सांसे ख़त्म हो गयी ,वही पुस्तक ,,,,......!!!!!!!!...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कूट नीति

 *कूटने से बढ़ती है -इम्युनिटी पॉवर*                 *दादा जी से पूछा*     *कि पहले लोग बहुत कम*           *बीमार  होते थे ?*            *तो...