जोहांसबर्ग में नौवां विश्व हिन्दी सम्मेलन



जोहांसबर्ग में नौवां विश्व हिन्दी सम्मेलन शुरू जोहांसबर्ग: दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में शनिवार को नौवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की शुरूआत हो गई। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के लिए विशेष तौर पर बनाए गए गांधी ग्राम सभा के नेल्सन मंडेला सभागार में विदेश राज्यमंत्री प्रणीत कौर ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया।

दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्री प्रवीण गोवर्धन शाह इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि हैं। मॉरीशस के कला व संस्कृति मंत्री मुकेश्वर चुनी भी विशेष तौर पर कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं।

हिन्दी को विश्व भाषा बनाने का सपना लेकर 1975 में नागपुर से शुरू हुई इस यात्रा के मौजूदा पड़ाव जोहांसबर्ग में देश और दुनिया के हिंदी के अनेक विद्वान, विचारक, जानकार, पत्रकार और साहित्यकार शिरकत कर रहे हैं जो तीन दिन तक हिंदी के प्रचार और प्रसार के तमाम आयामों पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन के पहले दिन तीन सत्रों का आयोजन किया गया है। पहले सत्र में महात्मा गांधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ विषय पर, दूसरे सत्र में अफ्रीका में हिंदी शिक्षण-युवाओं का योगदान और तीसरे सत्र में सूचना प्रौद्योगिकी-देवनागरी लिपि और हिंदी का सामथ्र्य विषय पर चर्चा होगी।

दक्षिण अफ्रीका में हो रहे इस सम्मेलन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत में पहली बार हिंदी के लिए राष्ट्रभाषा का प्रयोग करने वाले महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका को प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किया था।

दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त वीरेंद्र गुप्ता ने सम्मेलन में आए लोगों का स्वागत करते हुए कहा, "दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के बारे में एक महत्वपूर्ण बात कही जाती है कि भारत ने एक बैरिस्टर को दक्षिण अफ्रीका भेजा था और दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें महात्मा बनाकर भारत वापस भेजा।"

उन्होंने कहा कि गांधीजी की वजह से दक्षिण अफ्रीका और भारत में आत्मीय संबंध है और इस सम्मेलन के जोहांसबर्ग में आयोजन से हिंदी के माध्यम से दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ किए जाने का प्रयास किया जाएगा।

सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अतिथियों के स्वागत में डरबन स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के शिक्षकों और छात्रों के एक दल ने हिंदी में स्वागत गान किया। इसके बाद पारम्परिक दक्षिण अफ्रीका स्वागत गान किया गया।

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