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    शिवमूर्ति की रचनाओं पर अन्य लेखकों के मत
    शिवमूर्ति की रचनाओं पर अन्य लेखकों के मत
    सहजता बातचीत को सार्थक व जीवन्त बनाती है
    संवेद ७३-७५ (कथाकार शिवमूर्ति पर एकाग्र)
    संवेद ७३-७५ (कथाकार शिवमूर्ति पर एकाग्र)
    शिवमूर्ति के गाँव में - बलराम
    Pride of Lucknow Award In Lucknow Leterary Festival
    जुल्मी
    मेरी पुस्तक 'सृजन का रसायन' पर एक टिप्पणी
    चीन में दूसरा दिन
    लू शुन के देश में
    'शिवमूर्ति' पर केन्द्रित 'मंच' का विशेषांक
    'शिवमूर्ति' पर केन्द्रित 'मंच' का विशेषांक
    सृजन प्रकिया तथा संस्मरण के सहमेल से लिखी गयी मेरी पुस्तक - सृजन का रसायन, अभी अभी राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली से प्रकाशित हुई हैं. प्रस्तुत हैं उसी का एक अंश
    शिवमूर्ति से मुलाकात - डॉ. आईदान सिंह भाटी
    शिवमूर्ति के यहाँ कर्ता और कहनहारे का फ़र्क मिट जाता है - विवेक मिश्र
    शिवमूर्ति के यहाँ कर्ता और कहनहारे का फ़र्क मिट जाता है - विवेक मिश्र
    ''प्रेमचंद की कहानियॉं किस्सागोई का जो मानक सामने रखती हैं, शिवमूर्ति अपनी कहानियों में वही लीक अपनाते हैं''-डॉ.ओम निश्चल
    ''प्रेमचंद की कहानियॉं किस्सागोई का जो मानक सामने रखती हैं, शिवमूर्ति अपनी कहानियों में वही लीक अपनाते हैं''-डॉ.ओम निश्चल
    तुम सब कसाई हो और ये सारा गाँव “कसाईबाड़ा” है
    तुम सब कसाई हो और ये सारा गाँव “कसाईबाड़ा” है
    ६० के हुए शिवमूर्ति
    हिन्दी का लेखक खतरे नहीं उठाता : शिवमूर्ति
    आपने सुना है शिवमूर्ति को
    आपने सुना है शिवमूर्ति को
    'गोदान' के पाठ में संशोधन की जरूरत
    'गोदान' के पाठ में संशोधन की जरूरत
    किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित मेरे साक्षात्कार किताब की एक झलक
    प्रभात खबर के रविवार 26 अगस्त 2012 अंक में प्रकाशित मेरा एक इन्टरव्यू
    मेरे कथा साहित्य पर विभिन्न आलोचकों एवं लेखकों द्वारा व्यक्त मत से कुछ........
    मेरे कथा साहित्य पर विभिन्न आलोचकों एवं लेखकों द्वारा व्यक्त मत से कुछ........
    मित्र बलराम द्वारा लिखित मेरा एक पोर्ट्रेट
    तहलका हिंदी के 31 मई 2014 संस्करण में प्रकाशित मेरा एक इन्टरव्यू
    मई 2013 में साउथ अफ्रिका
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    प्रख्यात आलोचक सुशील सिद्धार्थ के सम्पादन में ‘दूसरी परम्परा’ के प्रवेशांक (सितम्बर-नवम्बर 2013) में रसायन और उसके आलम्ब पर आधारित मेरे एक आख्यान का अंश
    साहित्यिक पत्रिका संवेद अंक-60 में दुर्गाप्रसाद गुप्त द्वारा मेरे उपन्यास ‘त्रिशुल’ पर लिखित आलेख ‘प्रतिरोध’ के परिप्रेक्ष्य का काउन्टर टेक्स्ट’
    उज्जैन से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘समावर्तन’ के सितम्बर 2013 अंक में प्रकाशित रचना
    ‘दृश्यांतर’ पत्रिका के प्रवेशांक (अक्टूबर २०१३) में माँ पर केन्द्रित मेरा एक संस्मरण
    पुरस्कार की आकांक्षा
    पुरस्कार की आकांक्षा
    शिवमूर्ति जी के चित्र -
    बांग्ला लेखक तथा अनुवादक समरचन्द जी ने कसाईखाना शीर्षक से मेरी कुछ कहानियों का बांग्ला अनुवाद प्रकाशित कराया है। जिसका लोकार्पण पिछले दिनों आसनसोल में हुआ। प्रस्तुत हैउक्त कहानी संग्रह का मुख् पृष्ठ।
    मेरे उपन्यास आखिरी छलांग का प्रसिद्ध अनुवादक आर.पी. हेगड़े द्वारा कोनेया जिगिथा के नाम से किया गया कन्नड़ अनुवाद प्रकाशित हुआ है। प्रस्तुत है उक्त उपन्यास का मुख पृष्ठ।
    मृत्यु का स्वागत
    लम्बी कहानी : बानाना रिपब्लिक
    लम्बी कहानी : बानाना रिपब्लिक
    लम्बी कहानी अकाल दण्ड
    लम्बी कहानी अकाल दण्ड
    यह कहानी हंस कथा मासिक के जुलाई १९९१ के अंक में प्रकाशित हुई थी, ब्लॉग के पाठकों के लिए प्रस्तुत है.
    यह कहानी हंस कथा मासिक के जुलाई १९९१ के अंक में प्रकाशित हुई थी, ब्लॉग के पाठकों के लिए प्रस्तुत है.
    कैलेंडर में उपस्थिति : स्मृति हेतु
    ब्लॉग के पाठकों के लिए प्रस्तुत है 'समकालीन सरोकार' फरवरी २०१३ में प्रकाशित मेरा यात्रा वृतांत
    ब्लॉग के पाठकों के लिए इंडिया टुडे में प्रकाशित मेरा विवरण
    देवि माँ सहचरि प्राण
    देवि माँ सहचरि प्राण
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    लमही पत्रिका (अक्टूबर-दिसम्बर २०१२) में मेरी कहानियों पर प्रखर आलोचक राहुल सिंह का लेख प्रकाशित हुआ है-
    लेखक की पॉलिटिक्स है - प्रतिरोध
    लेखक की पॉलिटिक्स है - प्रतिरोध
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    लमही पत्रिका ने अपने अक्टूबर-दिसम्बर, २०१२ का अंक मेरे ऊपर केन्द्रित किया है, जिसे आप लमही के ब्लॉग-htt://lamahipatrika.blogspot.com, पर तथा फेसबुक- htt://www.facebook.com/people/lamahi-patrika/100003787422744
    मंच पत्रिका ने अपने जनवरी-मार्च २०११ के अंक को मेरे ऊपर केन्द्रित किया है, इसे आप निम्न वेबसाइट पर विस्तृत देख सकते हैं. वेबसाइट-WWW.MANCHPRAKASHAN.COM
    केशर-कस्तूरी
    केशर-कस्तूरी
    जैक लंडन के देश में
    जैक लंडन के देश में
    भरतनाट्‌यम
    भरतनाट्‌यम
    सिरी उपमा जोग
    तिरिया चरित्तर
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    कसार्इबाड़ा
    लेखक की भूमिका योगी और भोगी की साथ साथ है
    'डॉ. सूर्यनारायण'. तर्पणः- कथा साहित्य के अभिजात्य को चुनौती
    'डॉ. सूर्यनारायण'. तर्पणः- कथा साहित्य के अभिजात्य को चुनौती
    वर्ण व्यवस्था का तर्पण:- डा. रामबक्ष
    वर्ण व्यवस्था का तर्पण:- डा. रामबक्ष
    ख्वाजा, ओ मेरे पीर!
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    साहित्यिक गतिविधियाँ
    शिवमूर्ति की कहानियों पर वरिष्ट आलोचक वीरेन्द्र मोहन के आलेख के कुछ अंश-
    शिवमूर्ति की कहानियों पर वरिष्ट आलोचक वीरेन्द्र मोहन के आलेख के कुछ अंश-
    1
    शिवमूर्ति के उपन्यास 'त्रिशूल' पर वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र मोहन के आलेख के कुछ अंश
    शिवमूर्ति के उपन्यास 'त्रिशूल' पर वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र मोहन के आलेख के कुछ अंश
    कथाकार शिवमूर्ति से सुशील सिद्धार्थ की बातचीत
    कथाकार शिवमूर्ति से सुशील सिद्धार्थ की बातचीत
    'पगडंडिया'
    'पगडंडिया'
    1
    (फोकस) मरण-फांस से पार जाने की 'छलांग'
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    अभी तो हम मुस्तैद पिछलग्गू भी नहीं हैं
    अभी तो हम मुस्तैद पिछलग्गू भी नहीं हैं
    'तिरिया चरित्तर' की नायिका के नाम पत्र (शिवमूर्ति)
    आखिरी छलांग
    लेखक की भूमिका
    लेखक की भूमिका
    1
    तर्पण (उपन्यास) का एक अंश
    चाहती हूं ए कोई यादगार उपन्यास लिखें
    चाहती हूं ए कोई यादगार उपन्यास लिखें
    2
    जीने का शिवमूर्तियाना अंदाज
    जीने का शिवमूर्तियाना अंदाज
    त्रिशूल (उपन्यास ) का एक अंश
    तर्पण
    केशर कस्तूरीः अविस्मरणीय स्त्रियों का संसार
    संगमन - 15
    1
    समकालीन हिंदी कहानीः दिशा और उसकी चुनौतियां / शिवमूर्ति
    समकालीन हिंदी कहानीः दिशा और उसकी चुनौतियां / शिवमूर्ति
    6
    लेखक जन-आंदोलनों में भागीदारी निभाएं
    4
    समय ही असली स्रष्टा है / शिवमूर्ति
    समय ही असली स्रष्टा है / शिवमूर्ति
    लेखकों, आलोचकों ने मिलकर भगाया पाठकों को / शिवमूर्ति
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    1
    जंग जारी है / शिवमूर्ति
    उपन्यास.....तर्पण / शिवमूर्ति
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    2
    'न रुका, न चुका हूँ' / संजीव
    'न रुका, न चुका हूँ' / संजीव
    3
    कहानी..... सागर सीमान्त/ संजीव
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    2
    story ........Tiriya Charittar / shivmurti
    1
    स्वतन्त्र भारत का यथार्थ और मेरी प्रिय किताब
    आजादी का स्वप्न और 'मैला आंचल' का यथार्थ
    पिथौरागढ़ में जुटे तीन पीढ़ियों के कथाकार
    वाचन की लोक परंपरा और कथा पाठ
    इक्कीसवीं सदी में हिन्दी कहानी का मुहावरा
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    कहानी में कथ्य और शिल्प की प्रयोगशीलता का संकट
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    श्रीलाल शुक्ल, हृदयेश, कामतानाथ और काशीनाथ सिंह के साथ
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    संगमन के साथ कथाकारों की नई पीढ़ी
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