जतायू प्रसंग

 *🙏प्रवचनमाला🙏

 हमे गलत का सदैव विरोध करना चाहिये......

.* गिद्ध राज जटायू के प्रसंग से आज के प्रवचन माला को प्रारंभ करना चाहूंगा।।। गिद्ध राज जटायु के बारे में लगभग सभी को जानकारी होगी।।ये वही जटायु थे जिन्होंने रावण को मार कर अपनी चोंच से एक घड़ी के लिए मूर्छित कर दिया था।। रावण जब सीता का हरण करके ले जा रहा था तब जटायु ने उसको ललकारते हुए कहा था कि अरे दुष्ट रुक तू मेरी बेटी सीता को हरण करके कहां ले जा रहा है ।।जटायु रावण से संघर्ष करते हैं।। और जब रावण ने देखा कि जटायु हम पर भारी पड़ रहा है।। तब उसने अपना तलवार निकाल और जटायु के पंखों को काट दिया।। जटायु धरती पर गिर गए।। अपनी अंतिम सांसे गिन रहे जटायु ने कहा कि मुझे पता था कि मैं रावण से नहीं जीत सकता।। लेकिन फिर भी मैं लड़ा।।यदि मैं नही लड़ता  तो आने वाली पीढ़ियां मुझे कायर कहति।। जब रावण जटायु के दोनों पंख काट डाले तो काल आया।। और जैसे ही काल आया तो जटायु ने ललकारते हुवे कहा ...... खबरदार ये काल आगे बढ़ने की कोशिश मत करना।। मैं मृत्यु को स्वीकार तो करूंगा परंतु मुझे तब तक नहीं मार सकते हो जब तक मैं सीता जी की सुधि श्री राम को नहीं सुना देता हूँ।।और कथा कहती है कि मौत उन्हें छू नहीं पाई।।। तब तक खड़ी रही जब तक श्री राम से जटायु को भेंट नहीं हो जाती है।। किंतु महाभारत के भीष्म पितामह 6 महीने तक बाणों की शैया पर लेट कर मौत का इंतजार करते हैं। भगवान श्री कृष्ण  पास में खड़े हैं।। भीष्म रो रहे हैं। भगवान मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं।। कितना अलौकिक दृश्य है ये दृश्य..... रामायण में जटायु भगवान की गोद रूपी सय्या में प्राण त्याग रहा है ।।और यहां भीष्म बाणों की शैया पर लेटे लेटे रो रहे हैं।।जबकि भगवान यहां भी खड़े हैं।। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है कि भरे दरबार में भीष्म ने  द्रोपती की इज्जत लूटते हुए देखा था।। विरोध नहीं कर पाए थे ।।चाहते तो दुशासन के विरोध में खड़े हो जाते।।  दुर्योधन का विरोध कर देते।। लेकिन द्रोपती चीखती रही ,,चिल्लाती रही,,बिलखती रही और भीष्म सिर झुकाए बैठे रहे।। एक अबला की रक्षा नहीं कर पाए।। उसका परिणाम यह हुआ कि इक्षा मृत्यु का वरदान पाने पर भी बानो की शय्या मिली ।।और जटायु ने नारी का सम्मान किया।।अपने प्राणों की आहुति दे दी तो मरते समय भगवान श्री राम की गोद की शय्या मिली।। जो दूसरों के साथ गलत होते देखकर भी आंखें मूंद लेते हैं उनकी गति भीष्म जैसी होती है जो अपना परिणाम जानते हुए भी औरों के लिए संघर्ष करते हैं उनका महात्म्य जटायु जैसा कीर्तिमान होता है। हमें अपने जीवन में हर पल हर,, क्षण गलत का विरोध करना चाहिए।।हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए क्योंकि सत्य परेशान होता है पराजित नहीं.....

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