बात पते की / पते की बात

 *हम और हमारी गृहस्थी*👇🏾👇🏾


आज हर दिन किसी न किसी का घर खराब हो रहा है ।

*इसके कारण और जड़ पर कोई नहीं जा रहा।*


*1, माँ बाप की अनावश्यक दखलंदाज़ी।*

*2, संस्कार विहीन शिक्षा*

*3, आपसी तालमेल का अभाव* 

*4, ज़ुबान*

*5, सहनशक्ति की कमी*

*6, आधुनिकता का आडम्बर*

*7, समाज का भय न होना*

*8, घमंड झूठे ज्ञान का*

*9, अपनों से अधिक गैरों की राय*

*10, परिवार से कटना।*


*मेरे ख्याल से बस यही 10 कारण हैं शायद ?*

पहले भी तो परिवार होता था,

*और वो भी बड़ा।*

लेकिन वर्षों आपस में निभती थी ।

*भय भी था प्रेम भी था और रिश्तों की मर्यादित जवाबदेही भी।*

पहले माँ बाप ये कहते थे कि मेरी बेटी गृह कार्य मे दक्ष है, 

*और अब मेरी बेटी नाज़ो से पली है आज तक हमने तिनका भी नहीं उठवाया।*

तो फिर करेगी क्या शादी के बाद ?

*शिक्षा के घमण्ड में आदर सिखाना और परिवार चलाने के सँस्कार नहीं देते।*

माँएं खुद की रसोई से ज्यादा बेटी के घर में क्या बना इसपर ध्यान देती हैं!

*भले ही खुद के घर में रसोई में सब्जी जल रही हो।*

ऐसे मे वो दो घर खराब करती हैं।

*मोबाईल तो है ही रात दिन बात करने के लिए।*

परिवार के लिये किसी के पास समय नहीं।

*या तो TV या फिर पड़ोसन से एक दूसरे की बुराई या फिर दूसरे के घरों में ता‌क-झांक।*

जितने सदस्य उतने मोबाईल।

*बस लगे रहो।*

बुज़ुर्गों को तो बोझ समझते हैं।

*पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन तक नहीं कर सकता।*

सब अपने कमरे में।

*वो भी मोबाईल पर।*

बड़े घरों का हाल तो और भी खराब है।

*कुत्ते बिल्ली के लिये समय है।*

परिवार के लिये नहीं।

*सबसे ज्यादा गिरावट तो इन दिनों महिलाओं में आई है।*

दिन भर मनोरँजन, 

*मोबाईल,*

स्कूटी.. 

*समय बचे तो बाज़ार*

*और ब्यूटी पार्लर।*

जहां घंटों लाईन भले ही लगानी पड़े ।

भोजन बनाने या परिवार के लिये समय नहीं।

*होटल रोज़ नये नये खुल रहे हैं।*

जिसमें स्वाद के नाम पर कचरा बिक रहा है।

*और साथ ही बिक रही है बीमारी और फैल रही है घर में अशांति।*

क्योंकि घर के शुद्ध खाने में पौष्टिकता तो है ही प्रेम भी है।

*लेकिन ये सब पिछड़ापन हो गया है।*

आधुनिकता तो होटलबाज़ी में है।

*बुज़ुर्ग तो हैं ही घर में चौकीदार।*

पहले शादी ब्याह में महिलाएं गृहकार्य में हाथ बंटाने जाती थी।

*और अब नृत्य सीखकर।*

क्यों कि महिला संगीत मे अपनी प्रतिभा जो दिखानी है।

*जिस की घर के काम में तबियत खराब रहती है वो भी घंटों नाच सकती है👌🏻*

घूँघट और साड़ी हटना तो ठीक है।

*लेकिन बदन दिखाऊ कपड़े ?*

ये कैसी आधुनिकता है ?

*बड़े छोटे की शर्म या डर रही है क्या ?*

वरमाला में पूरी फूहड़ता।

*कोई लड़के को उठा रहा है।*

कोई लड़की को उठा रहा है 

ये सब क्या है ?

*और हम ये तमाशा देख रहे हैं मौन रहकर।*

सब अच्छा है 👌🏻

*माँ बाप बच्ची को शिक्षा दे रहे है।*

ये अच्छी बात है 

*लेकिन उस शिक्षा के पीछे की सोच ?*

ये सोच नहीं है कि परिवार को शिक्षित करें।

*बल्कि दिमाग में ये है कि कहीं तलाक वलाक हो जाये तो अपने पाँव पर खड़ी हो जाये !*

कमा खा ले !

*जब ऐसी अनिष्ट सोच और आशंका पहले ही दिमाग में हो तो रिज़ल्ट तो वही सामने आना है।*

साइन्स ये कहता है कि गर्भवती महिला अगर कमरे में सुन्दर शिशु की तस्वीर टांग ले तो शिशु भी सुन्दर और हृष्ट पुष्ट होगा।

*मतलब हमारी सोच का रिश्ता भविष्य से है।*

बस यही सोच कि पांव पर खड़ी हो जायेगी, गलत है ।

*संतान सभी को प्रिय है।*

लेकिन ऐसे लाड़ प्यार में हम उसका जीवन खराब कर रहे हैं।

*पहले स्त्री छोड़ो पुरुष भी कोर्ट कचहरी से घबराते थे।*

और शर्म भी करते थे।

*अब तो फैशन हो गया है।*

पढे लिखे युवा तलाकनामा तो जेब मे लेकर घूमते हैं।

*पहले समाज के चार लोगों की राय मानी जाती थी।*

और अब माँ बाप तक को जूते पर रखते है।

*अगर गलत है तो बिना औलाद से पूछे या एक दूसरे को दिखाये रिश्ता करके दिखाओ तो जानूं ?*

ऐसे में समाज या पँच क्या कर लेगा,

सिवाय बोलकर फ़जीहत कराने के ?

*सबसे खतरनाक है औरत की ज़ुबान।*

कभी कभी न चाहते हुए भी चुप रहकर घर को बिगड़ने से बचाया जा सकता है!

*लेकिन चुप रहना कमज़ोरी समझती है।*

आखिर शिक्षित है।

*और हम किसी से कम नहीं वाली सोच जो विरासत में लेकर आई है।*

आखिर झुक गयी तो माँ बाप की इज्जत चली जायेगी।

*इतिहास गवाह है कि द्रोपदी के वो दो शब्द ..*

*अंधे का पुत्र भी अंधा* ने महाभारत करवा दी।

*काश चुप रहती।*

गोली से बड़ा घाव बोली का होता है।

*आज समाज सरकार व सभी चैनल केवल महिलाओं के हित की बात करते हैं।*

पुरुष जैसे अत्याचारी और नरभक्षी हों।

*बेटा भी तो पुरुष ही है।*

एक अच्छा पति भी तो पुरुष ही है।

*जो खुद सुबह से शाम तक दौड़ता है, परिवार की खुशहाली के लिये।*

खुद के पास भले ही पहनने के कपड़े न हों।

*घरवाली के लिये हार के सपने देखता है।*

बच्चों को महँगी शिक्षा देता है!

*मैं मानता हूँ पहले नारी अबला थी।*

माँ बाप से एक चिठ्ठी को मोहताज़!

*और बड़े परिवार के काम का बोझ।*

अब ऐसा है क्या ?

*सारी आज़ादी।*

मनोरंजन हेतु TV,

*कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन,* 

मसाला पीसने के लिए मिक्सी, 

*रेडिमेड आटा,*

पानी की मोटर, 

*पैसे हैं तो नौकर चाकर,*

घूमने को स्कूटी या कार 

*फिर भी और आज़ादी चाहिये।*

आखिर ये मृगतृष्णा का अंत कब और कैसे होगा ?

*घर में कोई काम ही नहीं बचा।*

दो लोगों का परिवार।

*उस पर भी ताना।।*

कि रात दिन काम कर रही हूं।

*ब्यूटी पार्लर आधे घंटे जाना आधे घंटे आना और एक घंटे सजना नहीं अखरता।*

लेकिन दो रोटी बनाना अखर जाता है।

*कोई कुछ बोला तो क्यों बोला ?*

*बस यही सब वजह है घर बिगड़ने की।*

खुद की जगह घर को सजाने में ध्यान दे तो ये सब न हो।

*समय होकर भी समय कम है परिवार के लिये।*

ऐसे में परिवार तो टूटेंगे ही।

*पहले की हवेलियां सैकड़ों बरसों से खड़ी हैं।*

और पुराने रिश्ते भी।

*आज बिड़ला सिमेन्ट वाले मजबूत घर कुछ दिनों में ही धराशायी।*

और रिश्ते भी महीनों में खत्म।

*इसका कारण है,*

घरों को बनाने में भ्रष्टाचार

और रिश्तों मे ग़लत सँस्कार।

*खैर हम तो जी लिये।*

सोचे आनेवाली पीढी।

*घर चाहिये या दिखावे की आज़ादी ?*

दिनभर घूमने के बाद रात तो घर में ही महफूज़ रहती है ।


*मेरी बात क‌इयों को हो सकता है बुरी लगी लगे।*

विशेषकर महिलाओं को।

*लेकिन सच तो यही है।*

समाज को छोड़ो,

*अपने इर्द गिर्द पड़ोस में देखो।*

सब कुछ साफ दीख जायेगा।

*यही हमारे समाज में घर-घर की कहानी है।*

जो युवा बहनें हैं और जिनको बुरा लगा हो वो थोड़ा इंतजार करो।

*क्यों कि सास भी कभी बहू थी के समय में देरी है।*

लेकिन आयेगा ज़रुर


*मुझे क्या है जो जैसा सोचेगा सुख दुःख उन्हीं के खाते में आना है 🙏🏻*

बस तकलीफ इस बात की है कि हमारी ग़लती से बच्चों का घर खराब हो रहा है।

*वे नादान हैं।*

क्या हम भी हैं ?

*शराब का नशा मज़ा देता है।*

लेकिन उतरता ज़रुर है।

*फिर बस चिन्तन ही बचता है कि क्या खोया क्या पाया ?*

पैसों की और घर की बर्बादी।


*उसके बाद भी शराब के चलन का बढ़ना आज की आधुनिक शिक्षा को दर्शाता है।*

अपना अपना घर देखो सभी।

*अभी भी वक्त है।*

नहीं तो व्हाटस एप में आडियो भेजते रहना ,

जग हंसाई के खातिर।

*कोई भी समाजसेवी कुछ नहीं कर पायेगा।*

सिवाय उपदेश के।


*आपकी हर समस्या का निदान केवल आप ही कर सकते हो।*

सोच के ज़रिये।

*रिश्ते झुकने पर ही टिकते है।*

तनने पर टूट जाते है।

*इस खूबी को निरक्षर बुज़ुर्ग जानते थे।*🙏🙏🙏🙏


आज का मूर्ख शिक्षित नहीं।

*काश सब जान पाते।*

*किसी को बुरा लगा हो तो क्षमा*🌹🙏🏻✌️✌️✌️✌️

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दो सौ पौराणिक कथाएं

कौन है हिन्दी की पहली कहानी ?

हातिमताई के किस्से कहानी