प्यार भरे दो बोल कहो। / किशोर कुमार कौशल

 तरस रही है जाने कब से, प्यार भरे दो बोल कहो। 

तुम सचमुच कितनी सुंदर हो, बस इतना मुँह खोल कहो।। 

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दिन भर खटती,लगी काम में अपनी सुध-बुध खोई सी। 

थक कर चूर हुई फिर भी कुछ करती जागी-सोई सी। 

कभी-कभी चेहरे से लगती हँसती भी कुछ रोई सी। 

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पीछे सोना पहले जगना,क्या इस धुन का मोल कहो।

तुम सचमुच कितनी सुंदर हो- - - - - - - - - - - -

खाना खाते हुए कभी तो उसके मन में रह देखो। 

हाथों में जादू है तेरे, इतना उससे  कह  देखो। 

कभी-कभी छुट्टी के दिन उसकी दो बातें सह देखो। 

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और नहीं कुछ करना तुम बातों में मिसरी घोल कहो। 

तुम सचमुच कितनी सुंदर हो- - - - - - - - - - - -

उसकी ममता,उसकी सेवा से ही घर में सावन है। 

उसके त्याग-समर्पण से ही महका घर का आँगन है। 

उसके कारण ही घर,घर है,हर मौसम  मनभावन  है। 

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चलो आज पिक्चर चलते हैं, कभी जमाकर धौल कहो। 

तुम सचमुच कितनी सुंदर हो, बस इतना मुँह खोल कहो।। 

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  किशोर कुमार कौशल 

   बल्लभगढ़(फरीदाबाद)

      03/01/2021

मोबाइलः9899831002

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