त्र्यंबक रघुनाथ देवगिरिकर





प्रस्तुति--- नीलेश कुमार रानू, रुपेश कुमार 


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त्र्यंबक रघुनाथ देवगिरिकर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध गांधीवादी नेता थे। इनका जन्म 25 नवंबर, 1896 ई. को हुआ था। इन्होंने देश-प्रेम की भावना से प्रेरित होकर देश की बहुमूल्य सेवा की। त्र्यंबक रघुनाथ ने एक पत्रकार के रूप में अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत की थी। इनकी गिनती महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ताओं में की जाती है। त्र्यंबक रघुनाथ एक अच्छे लेखक के रूप में भी प्रसिद्ध थे, जिनकी रचनाएँ मुख्य रूप से मराठी में हैं।

गाँधी जी का प्रभाव

त्र्यंबक रघुनाथ देवगिरिकर ने 1920 ई. में पुणे से स्नातक करने के बाद अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। आरंभ में उन पर लोकमान्य तिलक और गोपालकृष्ण गोखले के विचारों का प्रभाव था। 1920 ई. में ही असहयोग आंदोलन आरंभ होने के बाद से त्र्यंबक रघुनाथ पूरी तरह से गांधी जी के प्रभाव में आ गए। पत्रकार के रूप में जीवन आरंभ करने के शीघ्र बाद ही वे आंदोलन में सक्रिय हुए और पुणे में शराब की दुकानों पर धरना देते हुए गिरफ़्तार कर लिए गए। 1930 ई. के नमक सत्याग्रह में भाग लेने के कारण भी उन्हें जेल की सज़ा हुई।

कांग्रेस सदस्य

महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ताओं में त्र्यंबक रघुनाथ की पहचान होने लगी थी। वे चार वर्ष तक 'कांग्रेस प्रदेश' के अध्यक्ष, 15 वर्षों तक 'अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी' के सदस्य और तीन वर्ष तक 'कांग्रेस कार्यसमिति' के सदस्य रहे। 1950 ई. से 1962 ई. तक वे राज्यसभा के सदस्य थे। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने अपनी पूरी शक्ति गाँधी जी के रचनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाने में लगा दी। वे गाँधी स्मारक निधि से संबद्ध थे। ‘दलित मुक्ति’ के कार्य को उन्होंने विशेष रूप में अपने हाथ में लिया। देवगिरिकर की गिनती एक अच्छे लेखक के रूप में भी की जाते है। उन्होंने राजनीतिक और सवैधानिक विषयों पर मराठी भाषा में कई पुस्तकों की रचना की। देशसेवा के निमित्त वे आजीवन अविवाहित रहे।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 367-368 |


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