शिखर पर तथागत अवतार तुलसी( tathagat avtar tulsi)




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Tue Jul 13 2010 18:25:16 GMT+0530 (India Standard Time)
बाइस वर्ष के तथागत अवतार तुलसी की उपलब्धियां किसी करिश्मे से कम नहीं हैं। जिस उम्र में हमारे देश के बच्चे आम तौर पर अपनी पढ़ाई पूरी करने में लगे होते हैं और रोजी-रोजगार के लिए सोचना शुरू करते हैं,उस उम्र में तथागत ने लाखों स्टूडेंट्स को दिशा दिखाने का जिम्मेदारी भरा काम संभाल लिया है। वह आईआईटी मुंबई में फिजिक्स पढ़ाने जा रहा है। इस तरह वह देश का सबसे कम उम्र का प्रोफेसर बन गया है।

पटना में पैदा हुए तथागत ने मात्र 9 साल की उम्र में दसवीं, 12 साल की उम्र में बीएससी और 13 साल की उम्र में एमएससी की परीक्षा पास की। फिर उसने 21 वर्ष की उम्र में क्वांटम कंप्यूटरिंग में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस से पीएचडी की डिग्री हासिल की। लेकिन तथागत की एक उपलब्धि शायद इन सब से ज्यादा है। उसने कनाडा की एक यूनिवर्सिटी का आकर्षक ऑफर ठुकरा कर और भारत में काम करने का निर्णय कर देशवासियों का दिल जीत लिया। उसने साबित किया कि उसके पास भौतिकी और गणित के जटिल सवालों से टकराने की सूझ के साथ-साथ व्यापक सामाजिक दृष्टि भी है। वह अपने देश में रहकर काम करने को अपनी जवाबदेही के तौर पर देखता है। उसका मानना है कि अगर भारत में रह कर काम किया जाए तो ऐसा भी दिन आएगा, जब हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए विदेशों का रुख़ नहीं करना पड़ेगा।

तथागत का कहना है कि ज्यादातर लोग पैसे के कारण विदेश जाते हैं। लेकिन उसके लिए पैसे से ज्यादा अहम है सरोकार। यही बात तथागत को खास बनाती है। वह क्वांटम कंप्यूटर पर काम कर रहा है। वह सुपर फास्ट कंप्यूटर बनाना चाहता है। जरूरत इस बात है कि तथागत को प्रोत्साहन दिया जाए, तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। वैसे तथागत इस मामले में जरूर सौभाग्यशाली रहा कि उसकी प्रतिभा को उसके परिवार ने जल्दी ही पहचाना और उसके पिता ने हर कदम पर उसका साथ दिया। प्राय: मध्यमवर्गीय परिवार इस मामले में उदासीन रहते हैं। अपने बच्चों को निर्धारित पैटर्न से बाहर निकलने देने का साहस मां-बाप अक्सर नहीं दिखा पाते। शायद यही वजह है कि कई बच्चों के भीतर मौजूद कुछ असाधारण बात दबी रह जाती है। तथागत आज शिखर पर है, पर अभी उसे बहुत आगे जाना है। उससे लोगों की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं। आशा की जानी चाहिए कि वह अपने और देश के सपने जरूर पूरे करेगा।

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