*कूटने से बढ़ती है -इम्युनिटी पॉवर*
*दादा जी से पूछा*
*कि पहले लोग बहुत कम*
*बीमार होते थे ?*
*तो दादा जी बोले*
*बेटा, पहले हम*
*हर चीज को कूटते थे...*
*जबसे हमने कूटना*
*छोड़ा है, तबसे ही*
**हम सब बीमार*
*होने लग गए है.....*
*मैंने पूछा :- वो कैसे ?*
*दादा जी मुस्कुराते हुए बोले...*
*जैसे पहले खेत से अनाज को कूट कर घर लाते थे*
*घर में मिर्च मसाला*
*कूटते थे .......*
*कभी कभी बड़ा भाई*
*छोटे भाई को*
*कूट देता था .......*
*और जब छोटा भाई*
*उसकी शिकायत*
*माँ से करता था .....*
*तो माँ.. बड़े भाई को*
*कूट देती थी ......*
*और कभी कभी तो*
*दादा जी भी*
*पोते को कूट देते थे ......*
*यानी कुल मिलाकर*
*कूटने का सिलसिला*
*निरंतर चलता*
*रहता था ......*
*कभी माँ.. बाजरा*
*कूट कर*
*शाम को खिचड़ी*
*बनाती थी .....*
*पहले हम कपडे भी*
*कूट कूट कर धोते थे .....*
*स्कूल में मास्टर जी भी*
*जमकर कूटते थे ....*
*जहाँ देखो, वहां पर*
*कूटने का काम*
*चलता रहता था .....*
*जिससे कभी कोई*
*बीमारी नजदीक*
*नही आती थी ......*
*सबका इम्युनिटी पॉवर*
*मजबूत बना रहता था ...*
*जब कभी बच्चा*
*सर्दी में नहाने से*
*मना करता था .....*
*तो माँ पहले उसे..*
*कूटकर उसकी इम्युनिटी*
*पॉवर बढ़ाती थी*
*और फिर नहलाती थी ...!*
*जब कभी बच्चा*
*खाना खाने से*
*मना करता था .....*
*तब भी माँ पहले*
*कूटती थी*
*फिर खाना खिलाती थी .....*
*स्कूल से शिकायत आती तो*
*पिताजी कूट देते थे*
*स्कूल जाने में आना कानी की तो....*
*मां कूट देती थी!*
*ऐसे ही सबका*
*इम्युनिटी पॉवर कायम*
*रहता था .....*
*तो कुल मिलाकर*
*सब कुटाई की*
*महिमा है*
*जो आज कल*
*बंद हो गयी है*
*जिससे हम सब बीमार*
*ज्यादा रहने लग गए हैं !*
*इसी को कहते हैं "कूटनीति"*👏😆👏
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