मंगलवार, 31 जुलाई 2012

महात्मा गांधी की छाया जैसे थे महादेव देसाई

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  Image Loading अन्य फोटो गांधी जी के साथ महादेव देसाई की एक


First Published:14-08-10 01:39 PM
Last Updated:14-08-10 01:40 PM
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बेहतरीन विचारक, लेखक तथा विख्यात स्वतंत्रता सेनानी महादेव देसाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बेहद करीबी थे और जीवन भर उनकी छाया की तरह रहे। गांधीवादी सुरेंद्र कुमार के अनुसार महादेव देसाई जीवन भर गांधी जी की छाया की तरह उनके साथ रहे और 1942 में जब आगा खां महल में उनका निधन हुआ, उस समय भी वह गांधी जी के साथ थे। कुमार के अनुसार शुरू से गांधी जी के विचारों से प्रभावित महादेव देसाई उच्च कोटि के विचारक और बेहतरीन लेखक थे। महात्मा गांधी के विचारों के कार्यान्वयन में महादेव देसाई की अहम भूमिका रही। कुमार के अनुसार महादेव देसाई ने लंबे समय तक डायरी लिखी जो महात्मा गांधी के चरित्र, विचार और उनके दर्शन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उनकी डायरियों से गांधी जी की जीवनशैली, उनके क्रियाकलापों आदि का विस्तृत विवरण मिलता है। महात्मा गांधी ने आठ अगस्त 1942 को मुंबई के अपने ऐतिहासिक भाषण में 'करो या मरो' का नारा दिया था। नौ अगस्त की सुबह ही अंग्रेजों ने महात्मा गांधी, सरोजनी नायडू, महादेव देसाई आदि को गिरफ्तार कर पुणे के आगा खां महल में बंद कर दिया। इसी जेल में 15 अगस्त को महादेव देसाई का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन पर महात्मा गांधी ने कहा था कि उन्होंने 50 साल की जिंदगी में ही 100 साल का काम कर दिया।
महादेव देसाई को महात्मा गांधी के निजी सचिव के रूप में जाना जाता है, लेकिन वह और कस्तूरबा उन्हें अपने पुत्र सरीखा मानते थे। गांधी जी ने पहली ही मुलाकात में देसाई की छिपी हुई विशेषताओं को पहचान लिया और उन्हें अपने साथ काम करने का न्यौता दिया। गांधी जी और देसाई का जो संबंध 1917 में बना, वह 1942 में देसाई के निधन तक बना रहा। गांधी जी के पत्र व्यवहार को व्यवस्थित रखने में महादेव देसाई की अहम भूमिका थी। निजी सचिव होने के नाते वह देर रात तक जगकर गांधी जी से जुड़े काम को पूरा करते थे। गांधी जी के कार्यों के अलावा देसाई विभिन्न पत्र पत्रिकाओं के लिए भी लिखते रहे तथा नियमित आधार पर डायरी लेखन भी किया। सूरत के एक गांव में एक जनवरी 1892 को पैदा हुए महादेव देसाई बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने छात्रवृत्ति के जरिए उच्च शिक्षा ग्रहण की। स्नातक तक की शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने कानून की भी पढ़ाई की और वकालत के पेशे से भी जुड़े। महादेव देसाई विभिन्न आंदोलनों से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे और इस वजह से वह कई बार जेल भी गए। महादेव देसाई ने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने उनके अखबार दि इंडिपेंडेंट का प्रकाशन जारी रखा। ब्रिटिश सरकार की तमाम पाबंदियों के बावजूद वह अखबार निकालते रहे। बाद में उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। देसाई ने नवजीवन का भी संपादन किया।

सोमवार, 30 जुलाई 2012

प्रेमग्रंथ -

  1. Photo: ३१.
"प्रेम-ग्रंथ"

"जब रोम-रोम मेरे,किशोर 
पुलकित होता,
जब श्वाँस-श्वाँस तन ताप 
उग्र किंचित होता,

तब शुष्क धरा पर यह 
कैसा मृदु ओस दिखा,
वह प्रेम बीज बोता 
उस पर संतोष दिखा,

वह महा शक्ति मेरे 
शिव में संलयित हुई,
तब महाकाल में ज्योति 
किरण प्रज्जवलित हुई,

वह कौन? पीसता मेरी 
शिलाएँ,चूर्ण करे,
वह उर्ध्व चिन्ह,क्षैतिज- 
रेखा को पूर्ण करे,

ऋण चिन्ह हुआ धन चिन्ह,
जागता काम लगे,
यह प्रेम-ग्रंथ संजय का 
चिर संग्राम लगे,

हरती पीड़ा हर महादेव की,
शक्ति पुंज वह,
धन-धान्य,स्वर्ग वैभव देती 
एक देव कुंज वह

यह पंचभूत और विकट शून्य 
मिलकर मनु जीव बनाते हैं,
रज-वीर्य,अंड और शुक्र,संत!
जप-ध्यान-जोग दर्शाते हैं,

तुम आदिशक्ति मैं आदि देव,
तुम आदि भूत मैं अंतहीन,
मैं क्रियाहीन तुम ध्यानमग्न,
तुम रजस्वला,मैं दैव दीन,

तुम खंड-खंड में व्याप्त मेरे,
मैं तेरे खंड से चिर प्रचंड,
तुम अंड-अंड,मैं शुक्र-शुक्र,
शिवशक्ति मिलन जीवन अखंड,

तब कौन मूर्ख कहता है, 
मेरे प्रेमग्रंथ को काम ग्रंथ,
संजय धृतराष्ट्र नहीं केशव, 
तब तो रचता निर्वाण पंथ,

क्या धरती पर हल चला रहा,
वह कृषक लगे रत योग नहीं,
लिखता है संजय प्रेमग्रंथ में 
प्रीत,मात्र समभोग नहीं,

यह प्रेमग्रंथ रसधार,मित्र! तुम 
सुधा बूँद, चख लो, पी लो,
यह आदि-अंत का आदिग्रंथ और 
अंतवेद, लख लो, जी लो।।"

(लगातार)

संजय कुमार शर्मा

"प्रिय साथियों,आप सब तो मेरा लिखा पसंद करते ही हैं,क्या आप अपने दोस्तों को भी मेरी रचनाएँ शेयर "Share" नहीं करेंगे,उन्हें भी जोड़िए....ज़िन्दग़ी के खूबसूरत एहसासात के साथ....मुहब्बत के ज़िन्दा लमहात के साथ,आप सब का स्वागत है मेरे पेजेज़ "Sanjay Kumar Sharma","प्रेमग्रंथ - संजय कुमार शर्मा" and "ग्राम्यबाला - संजय कुमार शर्मा"...पर।"

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वटवृक्ष पर आपका स्वागत है




ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में ।
लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं....
आप सभी का स्वागत है इस यात्रा में कवयित्री रश्मि प्रभा के साथ .....

()मुखपृष्ठ ()परिकल्पना () ब्लोगोत्सव()ब्लॉग परिक्रमा () शब्द सभागार () प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ () साहित्यांजलि () शब्द शब्द अनमोल ()चौबे जी की चौपाल
परिकल्पना की नयी पहल :वटवृक्ष पर आपका स्वागत है , पधारने के लिए धन्यवाद !
एक ऐसी ई-पत्रिका जिसमें  आप साहित्य ,संस्कृति और सरोकार से एकसाथ रूबरू होते हैं . जहां आपकी सदिच्छा के अनुरूप सामग्रियां मिलती है. जो आपकी सृजनात्कता को पूरे विश्व की सृजनात्मकता से जोड़ने को सदैब प्रतिबद्ध रहती है.              अपनी रचनाएँ इस ई-मेल पर भेजें :

Monday, July 30, 2012


मेरी कामना


आँखों में सपने लिए
दिल के अरमानों से
कुछ लफ़्ज़ों को
कागज पर उतार दिया
पर
सम्पादक महोदय ने इन्कार कर
मुझको फटकार दिया
इसलिए
मैं चुपचाप बैठी थी अलसाई- सी
और दिल में दुनिया से रूसवाई थी
न कहीं ये दिल लगता था
बस यूहीं ये भटकता था
किन्तु
जब साथ दिया मेरी माँ ने
तब
मन उड़ने लगा हवा में
फिर
अन्धकार से हुआ सवेरा
धीरे-धीरे
जीवन सँवरने लगा मेरा
उम्मीदों से भरकर
मैं फिर लिखने लगी
आखिर
वो शुभ घड़ी आई
और
मेरी मेहनत रँग लाई
एक नहीं अनेक सम्पादकों ने
मेरी कविताएँ छपवाई
पूरी हुई मेरी कामना
अब दुनिया मेरी हो गई रोशनाई




डॉ.प्रीत अरोड़ा


शिक्षा-एम.ए हिन्दी पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से (यूनिवर्सिटी टापर),पी.एचडी(हिन्दी)पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से,बी.एड़ पँजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से . कार्यक्षेत्र—शिक्षिका अध्ययन एवं स्वतंत्र लेखन व अनुवाद । अनेक प्रतियोगिताओं में सफलता, आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों तथा साहित्य उत्सवों में भागीदारी, हिंदी से पंजाबी तथा पंजाबी से हिंदी अनुवाद। देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं व समाचार-पत्रों में नियमित लेखन । वेब पर मुखरित तस्वीरें नाम से चिट्ठे का सम्पादन. अनेक किताबों में रचनाएँ प्रकाशित सम्मान-अमर उजाला की ओर से सम्मानित पुरस्कार-‘वुमेन आन टाप ’पत्रिका के ओर से कहानी पुरस्कृत (मई-2012 ) युवा लेखिका के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) से सम्मानित “अनुभूति” नामक काव्य-संग्रह का सम्पादन (प्रकाशाधीन ) मनमीत पत्रिका का अतिथि सम्पादन  ।

14 comments:



expression said...
बहुत सुन्दर.... हर रचनाकार को यूँ ही सहारा सहयोग और सामान मिले.... अनु
सदा said...
जब साथ दिया मेरी माँ ने तब मन उड़ने लगा हवा में फिर अन्धकार से हुआ सवेरा धीरे-धीरे बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ...
प्रवीण पाण्डेय said...
मेहनत सफलता को प्रतीक्षा कराती है..अपनी संतुष्टि होने तक..
Rajesh Kumari said...
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार को ३१/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है
कुश्वंश said...
आँखों में सपने लिए दिल के अरमानों से कुछ लफ़्ज़ों को कागज पर उतार दिया अच्‍छी प्रस्‍तुति
Mukesh Kumar Sinha said...
duniya ho gayee roshnai:)) bahut sundar!!
ड़ा प्रीत अरोड़ा said...
आभार मित्रों, आप जैसे मित्रों का भी साथ मिला है तभी आज मैं युवा लेखिका बन गई हूँ.आप सभी को कोटि-कोटि नमन
ड़ा प्रीत अरोड़ा said...
आभार मित्रों, आप जैसे मित्रों का भी साथ मिला है तभी आज मैं युवा लेखिका बन गई हूँ.आप सभी को कोटि-कोटि नमन
शिवनाथ कुमार said...
आत्मविश्वास ही आगे बढाता है और माँ का आशीर्वाद हो सफलता कदम चूमती ही है ...
dheerendra said...
आखिर वो शुभ घड़ी आई और मेरी मेहनत रँग लाई एक नहीं अनेक सम्पादकों ने मेरी कविताएँ छपवाई पूरी हुई मेरी कामना अब दुनिया मेरी हो गई रोशनाई,,,,, माँ की दुआ जैसी कोई दुआ नही माँ जैसा पवित्र रिश्ता कोई दूसरा नही,,,,,, RECENT POST,,,इन्तजार,,,
Roshi said...
maa jab saath ho her muskil aasan ho jati hai........
Sunil Kumar said...
सुंदर अतिसुन्दर सारगर्भित रचना , बधाई
Sniel Shekhar said...
:) I feel positive and ready to fight back and write some good lines... Thanks for writing.
pratap said...
बधाई अतिसुन्दर बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ..

ये हैं हमारे प्रथम परिकल्पना सम्मान-२०१० के सम्मानित सदस्यगण



शोध की खातिर किस दुनिया में ? कहां गए ?

प्रिय भारत! / शम्भू बादल  प्रिय भारत!  शोध की खातिर किस दुनिया में ?  कहां गए ? साक्षात्कार रेणु से लेने ? बातचीत महावीर से करने?  त्रिलोचन ...