शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

आजादी के बाद का भारत




प्रस्तुति--- स्वामी शरण ,

 

स्वतन्त्रता के बाद भारत का संक्षिप्त इतिहास

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

१९४७ से १९५०

  • देश आजाद: १४ अगस्त १९४७ को जैसे ही घड़ी की सुई मे रात के १२ बजे, प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने देश के स्वतंत्र होने की घोषणा की।
  • शोक की लहर: ३० जनवरी १९४८ को उस समय सारे देश में शोक की लहर दौड़ गई, जब नाथूराम गोड्से ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी।
  • भारत-पाकिस्तान के बीच प्रथम युद्ध: देश विभाजन के बाद नए पड़ोसी बने पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। यह लड़ाई ३१ दिसम्बर, १९४८ को समाप्त हुई और इसमें दोनों देशों के लगभग १५००-१५०० सैनिक मारे गए तथा पाकिस्तान ने कश्मीर के एक भूभाग पर अधिकार कर लिया।
  • भारत बना गणतंत्र: संविधान सभा द्वारा १९४९ में पारित किए जाने के बाद २६ जनवरी, १९५० को पहली बार देश का संविधान स्वीकार किया गया।
  • जेल की बैरक में आईआईटी की स्थापना: सन् १९५० में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर के निकट हुबली जेल के परिव्यक्त बैरक में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के रूप में देश के पहले तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थान की नींव डाली गई।

१९५० से १९७०

१९७० से १९८०


भारत के प्रथम परमाणु परीक्षण के बाद पोखरण का एक दृश्य।

१९८० से १९९०


भोपाल गैस कांड स्मारक।
  • सड़क पर उतरी मारुति: १९८४ में ८०० सीसी की मारुति कार लांच हुई, जिसने देश में वाहन क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।
  • शाह बानो मामला: इस विवादास्पद मामले में उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम बोर्ड के निर्णय को पलटते हुए शाह बानो को गुजारा भत्ता देने को कहा लेकिन कट्टरपंथी मुस्लिम कार्यकर्ताओं के दबाव के आगे राजीव गांधी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रभावहीन बनाया।
  • कनिष्क बमकांड: २३ जून, १९८५ को बब्बर खालसा के आतंकवादियों ने आयरलैंड से टोरंटो आ रहे एयर इंडिया के विमान को बम से उड़ा दिया, जिसमें सवार सभी ३२९ यात्री मारे गए।
  • असम समझौता: १९८५ में राजीव गांधी सरकार और असम के चरमपंथी गुटों में ऐतिहासिक समझौते से यह आस बंधी थी कि इस राज्य में शांति हो जाएगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह संभव नहीं हो सका।
  • भारत-श्रीलंका शांति समझौता: भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जेआर ने १९८७ में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता एक भूल साबित हुआ और इसके चलते श्रीलंका में हिंसक आंदोलन जोर पकड़ने लगा।
  • मताधिकार की आयु सीमा घटी: १९८८ में राजीव गांधी सरकार ने मतदान के लिए न्यूनतम आयु सीमा २१ वर्ष से घटाकर १८ वर्ष कर दी।
  • पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण: भारत ने पूर्णतया स्वदेशी तकनीक पर आधारित बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र का १९८८ में सफल परीक्षण किया।
  • आरक्षण का पेंच: अगस्त १९९० में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए २७ प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया।

१९९० से २०००

२००० से २०१०

  • भारतीय संसद भवन पर हमला: १३ दिसंबर, २००१ को आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया, लेकिन देश के बहादुर सिपाहियों ने अपनी प्राणों की आहुति देकर भी आतंकवादियों के इरादों को विफल कर दिया।
  • तहलका कांड: तहलका डॉटकॉम ने स्टिंग ऑपरेशन के द्वारा रक्षा सौदों के लिए सांसदों और सैन्य अधिकारियों को घूस लेते हुए उजागर किया।
  • गोधरा जनसंहार: गुजरात के गोधरा में २७ फरवरी, २००२ को हिंदू तीर्थयात्रियों से भरी एक ट्रेन की बोगी को कुछ असामाजिक तत्वों ने जला डाला और जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अगले ही दिन पूरे राज्य में दंगे भड़क उठे।
  • कल्पना चावला का दुखद अंत: अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। ३ फरवरी, २००३ के दिन पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते समय कोलंबिया शटल यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और कल्पना सहित इसमें सवार सातों अंतरिक्ष यात्री मारे गए।
  • सहवाग बनें `मुल्तान का सुल्तान´: २००४ में पाकिस्तान के विरुद्ध मुल्तान टेस्ट में सहवाग शानदार तिहरा शतक जमाने वाले पहले क्रिकेटर बने।
  • भारत-अमेरिका परमाणु समझौता: २००५ में भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • सूचना का अधिकार: २००५ के सूचना के अधिकार कानून ने सरकारी बाबुओं को जवाबदेह बनाया।
  • ११/७, मुंबई की उपनगरीय रेलों में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फ़ोट: ११ जुलाई, २००६ को एक बार फिर मुंबई आतंकवादियो के निशाने पर आ गई। शाम के समय अपने घरों को लौट रहे लोकल ट्रेन के खचाखच भरे डिब्बों में २० मिनट के अंतराल पर हुए सात बम धमाको में २५० लोग मारे गए।
  • टाटा ने कोरस को खरीदा: २००७ में किसी भारतीय कंपनी द्वारा अब तक के सबसे बड़े अधिग्रहण के रूप में टाटा स्टील ने एंग्लो-डच कंपनी कोरस को खरीद लिया।
  • पहली महिला राष्ट्रपति: महाराष्ट्र की पहली महिला राज्यपाल बनने वाली प्रतिभा पाटील ने २५ जुलाई २००७ को देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की।
  • मुंबई २६/११: एक बार फिर राष्ट्र की वित्तीय राजधानी पर आतंकवादियों का हमला। बुधवार, २६ नवंबर, २००८ की रात लगभग १० पाकिस्तानी आतंकवादी आधुनिक हथियारों से युक्त होकर चर्चगेट स्टेशन, कामा अस्पताल, और ताज और ओबेरॉय-ट्रायडैन्ट में घुसे। ३ दिन तक चले कमांडो ऑपरेशन में २०० से अधिक लोग मारे गए, और १० में से नौ आतंकवादी भी। एक आतंकवादी, अजमल कसाब को जीवित पकड़ लिया गया।

२०१० से अब तक

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का आन्दोलन : अगस्त २०११ में

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

दिक्चालन सूची

मंगलवार, 1 जुलाई 2014

और अब गजलों में ढले गीता के श्लोक







प्रस्तुति-- दिनेश सिन्हा/ रीना शरण


धर्म के बजाए कर्म का उपदेश देने वाली भगवत गीता के संस्कृत श्लोकों को शायरी में ढाल कर श्लोक को लोक तक पहुंचाने का करिश्मा उर्दू के विख्यात शायर अनवर जलालपुरी ने किया है.
दुनिया भर में मुशायरों के लोकप्रिय संचालक और लाजवाब शायरी के लिए मशहूर अनवर जलालपुरी कभी "डेढ़ इश्किया" में मुशायरा पढ़ते हुए दिखते हैं तो कभी "अकबर द ग्रेट" के गीतकार के रूप में सामने आते हैं. लेकिन इस बार एक नई शक्ल में सामने आए हैं, "उर्दू शायरी में गीता" लेकर. इसमें उन्होंने भगवत गीता के 18 अध्यायों के 701 संस्कृत श्लोकों का दो पंक्तियों वाले करीब 1761 शेर में काव्यानुवाद किया है. गीता को शायराना शक्ल देने में उन्हें करीब 32 वर्ष लगे. उनके मुताबिक गीता धार्मिक नहीं बल्कि दार्शनिक ग्रंथ है. इसका अपना दर्शन है. इस ग्रंथ की आत्मा यही है जिसने उन्हें बचपन से ही बहुत प्रभावित किया.
लेकिन गीता पर पीएचडी करने की अपनी हसरत अनवर जलालपुरी पूरी नहीं कर पाए. बताते हैं कि यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन कराया लेकिन हालात ने साथ नहीं दिया. पर गीता का उपदेश दिल में समा गया था कि फल की चिंता मत कर. काम किए जा, तो जो दिल में कसक बाकी थी उससे धीरे धीरे गीता के श्लोकों को गजल के मीटर पर कसने लगे. गजल की बहर में गीता के श्लोकों को बांधना आसान काम नहीं था. बताते हैं कि कई बार तो एक श्लोक के काव्यानुवाद में गजल के छह छह मिसरे कहनी पड़ीं.
उर्दू शायरी में ढले गीता के श्लोकों के कुछ उदाहरण:
हां धृतराष्ट्र आखों से महरूम थे
मगर ये न समझो कि मासूम थे
इधर कृष्ण अर्जुन से हैं हमकलाम
सुनाते हैं इंसानियत का पैगाम
अजब हाल अर्जुन की आखों का था
था सैलाब अश्कों का रुकता भी क्या
बढ़ी उलझनें और बेचैनियां
लगा उनको घेरे हैं दुश्वारियां
तो फिर कृष्ण ने उससे पूछा यही
बता किससे सीखी है यह बुजदिली
भगवत गीता का यह पहला अनुवाद नहीं है. इससे पहले भी विभिन्न भाषाओं में गीता के अनुवाद हो चुके हैं. लेकिन अनवर जलालपुरी ने काव्यानुवाद किया है. यह अपने आप में पहला है. बताते हैं कि गीता के काव्यानुवाद के लिए उन्होंने ओशो, पंडित सुंदरलाल और अजमल खां की गीता के अलावा महात्मा गांधी की "गीता बोध" का भी अध्ययन किया. उन्होंने मनमोहन लाल छाबड़ा की "मन की गीता", अजय मालवीय तथा स्वामी रामसुखदास की गीता को भी पढ़ा. असनुदोई अहमद तथा ख्वाजा दिल मोहम्मद लाहौरी की "दिल की गीता" का भी अध्ययन कर उन्होंने गीता का शायराना नुस्खा पेश किया.
अदब और तहजीब के शहर लखनऊ में "उर्दू शायरी की गीता" का विमोचन करते हुए यूपी के सीएम अखिलेश ने कहा कि "ऐसे वक्त में जब देश में बड़ा राजनीतिक समर खत्म हुआ हो, यह किताब आना निहायत ही प्रासंगिक है. गीता हमेशा हम भारतीयों का मनोबल बढ़ाती है." विमोचन अवसर पर राम कथा वाचक संत मोरारी बापू बोले "मेरा यकीन है कि यह किताब दो अलग अलग संस्कृतियों को करीब लाएगी. श्लोक को लोक तक लाने का बेहतरीन काम उन्होंने शुरु किया है. मोरारी बापू ने कहा कि रामचरित मानस का भी उर्दू में तर्जुमा आना चाहिए.
रिपोर्ट: सुहैल वहीद, लखनऊ
संपादन: मानसी गोपालकृष्णन

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