सोमवार, 30 जुलाई 2012

वटवृक्ष पर आपका स्वागत है




ज़िन्दगी के दर्द ह्रदय से निकलकर बन जाते हैं कभी गीत, कभी कहानी, कोई नज़्म, कोई याद ......जो चलते हैं हमारे साथ, ....... वक़्त निकालकर बैठते हैं वटवृक्ष के नीचे , सुनाते हैं अपनी दास्ताँ उसकी छाया में ।
लगाते हैं एक पौधा उम्मीदों की ज़मीन पर और उसकी जड़ों को मजबूती देते हैं ,करते हैं भावनाओं का सिंचन उर्वर शब्दों की क्यारी में और हमारी बौद्धिक यात्रा का आरम्भ करते हैं....
आप सभी का स्वागत है इस यात्रा में कवयित्री रश्मि प्रभा के साथ .....

()मुखपृष्ठ ()परिकल्पना () ब्लोगोत्सव()ब्लॉग परिक्रमा () शब्द सभागार () प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ () साहित्यांजलि () शब्द शब्द अनमोल ()चौबे जी की चौपाल
परिकल्पना की नयी पहल :वटवृक्ष पर आपका स्वागत है , पधारने के लिए धन्यवाद !
एक ऐसी ई-पत्रिका जिसमें  आप साहित्य ,संस्कृति और सरोकार से एकसाथ रूबरू होते हैं . जहां आपकी सदिच्छा के अनुरूप सामग्रियां मिलती है. जो आपकी सृजनात्कता को पूरे विश्व की सृजनात्मकता से जोड़ने को सदैब प्रतिबद्ध रहती है.              अपनी रचनाएँ इस ई-मेल पर भेजें :

Monday, July 30, 2012


मेरी कामना


आँखों में सपने लिए
दिल के अरमानों से
कुछ लफ़्ज़ों को
कागज पर उतार दिया
पर
सम्पादक महोदय ने इन्कार कर
मुझको फटकार दिया
इसलिए
मैं चुपचाप बैठी थी अलसाई- सी
और दिल में दुनिया से रूसवाई थी
न कहीं ये दिल लगता था
बस यूहीं ये भटकता था
किन्तु
जब साथ दिया मेरी माँ ने
तब
मन उड़ने लगा हवा में
फिर
अन्धकार से हुआ सवेरा
धीरे-धीरे
जीवन सँवरने लगा मेरा
उम्मीदों से भरकर
मैं फिर लिखने लगी
आखिर
वो शुभ घड़ी आई
और
मेरी मेहनत रँग लाई
एक नहीं अनेक सम्पादकों ने
मेरी कविताएँ छपवाई
पूरी हुई मेरी कामना
अब दुनिया मेरी हो गई रोशनाई




डॉ.प्रीत अरोड़ा


शिक्षा-एम.ए हिन्दी पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से (यूनिवर्सिटी टापर),पी.एचडी(हिन्दी)पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से,बी.एड़ पँजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से . कार्यक्षेत्र—शिक्षिका अध्ययन एवं स्वतंत्र लेखन व अनुवाद । अनेक प्रतियोगिताओं में सफलता, आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों तथा साहित्य उत्सवों में भागीदारी, हिंदी से पंजाबी तथा पंजाबी से हिंदी अनुवाद। देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं व समाचार-पत्रों में नियमित लेखन । वेब पर मुखरित तस्वीरें नाम से चिट्ठे का सम्पादन. अनेक किताबों में रचनाएँ प्रकाशित सम्मान-अमर उजाला की ओर से सम्मानित पुरस्कार-‘वुमेन आन टाप ’पत्रिका के ओर से कहानी पुरस्कृत (मई-2012 ) युवा लेखिका के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) से सम्मानित “अनुभूति” नामक काव्य-संग्रह का सम्पादन (प्रकाशाधीन ) मनमीत पत्रिका का अतिथि सम्पादन  ।

14 comments:



expression said...
बहुत सुन्दर.... हर रचनाकार को यूँ ही सहारा सहयोग और सामान मिले.... अनु
सदा said...
जब साथ दिया मेरी माँ ने तब मन उड़ने लगा हवा में फिर अन्धकार से हुआ सवेरा धीरे-धीरे बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ...
प्रवीण पाण्डेय said...
मेहनत सफलता को प्रतीक्षा कराती है..अपनी संतुष्टि होने तक..
Rajesh Kumari said...
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार को ३१/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है
कुश्वंश said...
आँखों में सपने लिए दिल के अरमानों से कुछ लफ़्ज़ों को कागज पर उतार दिया अच्‍छी प्रस्‍तुति
Mukesh Kumar Sinha said...
duniya ho gayee roshnai:)) bahut sundar!!
ड़ा प्रीत अरोड़ा said...
आभार मित्रों, आप जैसे मित्रों का भी साथ मिला है तभी आज मैं युवा लेखिका बन गई हूँ.आप सभी को कोटि-कोटि नमन
ड़ा प्रीत अरोड़ा said...
आभार मित्रों, आप जैसे मित्रों का भी साथ मिला है तभी आज मैं युवा लेखिका बन गई हूँ.आप सभी को कोटि-कोटि नमन
शिवनाथ कुमार said...
आत्मविश्वास ही आगे बढाता है और माँ का आशीर्वाद हो सफलता कदम चूमती ही है ...
dheerendra said...
आखिर वो शुभ घड़ी आई और मेरी मेहनत रँग लाई एक नहीं अनेक सम्पादकों ने मेरी कविताएँ छपवाई पूरी हुई मेरी कामना अब दुनिया मेरी हो गई रोशनाई,,,,, माँ की दुआ जैसी कोई दुआ नही माँ जैसा पवित्र रिश्ता कोई दूसरा नही,,,,,, RECENT POST,,,इन्तजार,,,
Roshi said...
maa jab saath ho her muskil aasan ho jati hai........
Sunil Kumar said...
सुंदर अतिसुन्दर सारगर्भित रचना , बधाई
Sniel Shekhar said...
:) I feel positive and ready to fight back and write some good lines... Thanks for writing.
pratap said...
बधाई अतिसुन्दर बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ..

ये हैं हमारे प्रथम परिकल्पना सम्मान-२०१० के सम्मानित सदस्यगण



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

प्रेम जनमेजय होने का मतलब /

  मैं अगस्त 1978 की एक सुबह पांच बजे दिल्ली के अंतर्राज्यीय बस अड्डे पर उतरा था, किसी परम अज्ञानी की तरह, राजधानी में पहली बार,वह भी एकदम अक...