देव औरंगाबाद बिहार 824202 साहित्य कला संस्कृति के रूप में विलक्ष्ण इलाका है. देव स्टेट के राजा जगन्नाथ प्रसाद सिंह किंकर अपने जमाने में मूक सिनेमा तक बनाए। ढेरों नाटकों का लेखन अभिनय औऱ मंचन तक किया. इनको बिहार में हिंदी सिनेमा के जनक की तरह देखा गया. कामता प्रसाद सिंह काम और इनकi पुत्र दिवंगत शंकर दयाल सिंह के रचनात्मक प्रतिभा की गूंज दुनिया भर में है। प्रदीप कुमार रौशन और बिनोद कुमार गौहर की भी इलाके में काफी धूम रही है.। देव धरती के इन कलम के राजकुमारों की याद में .समर्पित हैं ब्लॉग.
रविवार, 9 अप्रैल 2023
०महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर विशेष।
दुलारी देवी का दोष क्या था हे महापंडित?
@डा अरविन्द सिंह वैचारिक हस्तक्षेप
-समूचे विश्व साहित्य को प्रभावित करने वाले महान साहित्यकार, इतिहासकार, भाषाविद, यायावर, घुमक्कड़ी के आचार्य, आज़मगढ़ माटी के लाल महापंडित राहुल सांकृत्यायन की आज जयंती है। उनकी स्मृतियों को नमन।
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को सदियों-सदियों बिसराया नहीं जा सकता है। लेकिन मेरा आग्रह इसके विपरीत उनके व्यक्तित्व के दूसरे पक्ष से है। उनकी प्रथम पत्नी दुलारी देवी के अनंत इंतजार और दुःखों के सागर में एक-एक दिन उस अनिश्चित कालीन इंतजार का कोई तो ठौर होता। कोई तो मंजिल होती। भारतीय नारी की प्रतिनिधि के रूप में उस महान दुलारी देवी की आस्था और पतिव्रता का कोई तो सिला मिलता। जिस केदार पांडेय से वह व्याही गईं। जिसके लिए वह अपने घर-बार को छोड़ पति के घर आयीं, क्या वह उस पति का प्रेम पा सकीं। क्या उन्हें छोड़ चले केदार पांडेय, दामोदर स्वामी, त्रिपिटिकाचार्य, महापंडित -राहुल सांकृत्यायन न्याय कर सकें। यह सवाल अतीत के गर्भ से निकलते हैं। जिसका जवाब आज तक नहीं खोजा जा सका। तो क्या इन सवालों का संबंध राहुल सांकृत्यायन से नहीं हैं। क्या उनकी व्याहता दुलारी देवी ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति में विवाह संस्कार और विधानों का पालन करते हुए, राहुल सांकृत्यायन का इतने लंबे कालखंड तक इंतजार करके अपराध किया, स्वयं के साथ, समाज की मान्यताओं के साथ, उसके आस्थाओं के साथ। आखिर क्यों नहीं कोई साहित्यकार दुलारी देवी के पक्ष में भी खड़ा नज़र आता है। एक विद्वान सनातनी ब्राह्मण से साम्यवाद का आचार्य, बिना बताए यशोधरा को छोड़ चले गौतम बुद्ध से प्रभावित होकर 'राहुल' सांकृत्यायन बन जाता है। तो सवाल उठता है कि क्या यशोधरा और दुलारी के अरमानों पर चढ़कर ही कोई बुद्ध और राहुल बन सकता है। तो क्या विवाह मंडप पर लिए गयें शपथ और वायदें, उनसे सवाल नहीं करते हैं। क्या राहुल सांकृत्यायन ने देश और दुनिया में जहां -जहां भी भ्रमण किया, खोज किया, विवाह किया, उन कालखंडों में तनिक भी दुलारी की याद नहीं आयी।
यह सवाल उस विद्वान सनातनी ब्राह्मण महापंडित केदार पांडेय से राहुल सांकृत्यायन की यात्रा पूरी करने पर बनते हैं या नहीं, आप स्वयं विचार कर सकतें हैं।
राहुल की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ी दुलारी देवी का जीवन, किसी अनंत इंतजार का कालखंड भर रह गया है। जिसका हासिल क्या है। यह सवाल है या नहीं। यह वैचारिक सवाल केवल इसलिए कि महान साहित्यकार इतिहासकार,भाषाविद, यायावर, Batch सांकृत्यायन की पत्नी दुलारी का दोष क्या था?
शुक्रवार, 7 अप्रैल 2023
प्रेमकथा
जोधा-अकबर
| अधिक जानेंइस लेख में सन्दर्भ या स्रोत नहीं दिया गया है। |
विश्वप्रसिद्ध प्रेमकथाओं में राधा-कृष्ण, शकुंतला-दुष्यंत, सावित्री-सत्यवान जैसी पौराणिक कथाओं के अलावा रानी रूपमती-बाज बहादुर, सलीम-अनारकली, हीर-रांझा, लैला-मजनूं, सोहनी-महिवाल, ढोला-मारू मिरज़ा-साहिवा जैसे प्रेम चरित्रों की गाथाएं अमर हैं।
राधा-कृष्ण
शकुंतला-दुष्यंत
सावित्री-सत्यवान
रानी रूपमती-बाज बहादुर
लैला-मजनूं
सलीम-अनारकली
हीर-रांझा
सोहणी-महिवाल
ढोला-मारु
शीरीं-फरहाद
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