अमेरिका का प्रवासी हिंदी साहित्य






प्रस्तुति-- अखौरी प्रमोद

भारत से इतर देशों में जो हिन्दी का साहित्य रचा जा रहा है उससे अनायास ही हिन्दी समृद्ध हुई है और उसका एक वैश्विक स्वरूप विकसित हुआ है। पिछले कुछ दशकों में यह विकास बड़ी तेजी से हुआ है और उसमें प्रवासी कहानीकारों का एक विशिष्ट योगदान है। यदि आज हिन्दी विश्व की सर्वाधिक बोली जानेवाली पाँच भाषाओं में है तो इसका श्रेय उस विशाल प्रवासी समुदाय को भी जाता है, जो भारत से इतर देशों में जाकर बसने के बावजूद हिन्दी को अपनाए हुए हैं। इन देशों में रचा जा रहा साहित्य, उस देश के परिवेश से ही हमारा परिचय नहीं कराता, वरन उनकी भाषा से शब्द भी ग्रहण कर रहा है। फ़लस्वरूप हिन्दी का भी एक नया स्वरूप विकसित हो रहा है और उस हिन्दी में लिखे गए साहित्य का एक अलग स्वाद है,एक नई जो पूर्व में अपरिचित थी, गन्ध है और उन देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के सरोकारों से ही नहीं वरन उस समाज की समस्याओं से भी हम परिचित हो रहे हैं जिसका अंग यह प्रवासी समुदाय है। हिन्दी भाषा में रचे जा रहे, पूरे विश्व के प्रवासी साहित्य को ध्यान में रखा जाय, तो ऐसा कहा जा सकता है कि अमेरिका के रचनाकारों का भी इसमें विशिष्ट स्थान व योगदान है।

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