धीरेंद्र अस्थाना-
धीरे-धीरे इस पत्रिका ने,जैसी कि उम्मीद भी थी,वह मुकाम छू लिया कि यहां कोई भी छपना चाहे। यह मुकाम पहले सिर्फ राजेंद्र यादव के समय वाले हंस को हासिल था।या फिर बाद में रवींद्र कालिया वाले नया ज्ञानोदय को।

देव औरंगाबाद बिहार 824202 साहित्य कला संस्कृति के रूप में विलक्ष्ण इलाका है. देव स्टेट के राजा जगन्नाथ प्रसाद सिंह किंकर अपने जमाने में मूक सिनेमा तक बनाए। ढेरों नाटकों का लेखन अभिनय औऱ मंचन तक किया. इनको बिहार में हिंदी सिनेमा के जनक की तरह देखा गया. कामता प्रसाद सिंह काम और इनकi पुत्र दिवंगत शंकर दयाल सिंह के रचनात्मक प्रतिभा की गूंज दुनिया भर में है। प्रदीप कुमार रौशन और बिनोद कुमार गौहर की भी इलाके में काफी धूम रही है.। देव धरती के इन कलम के राजकुमारों की याद में .समर्पित हैं ब्लॉग.

संस्कृतियों का क्षरण रोक दो!
अंधकार आवरण रोक दो!!
बिन विवाह सहवास के लिए,
किसी पुरुष का वरण रोक दो!
पश्चिम की सभ्यता विषैली,
संबंधों का मरण रोक दो!
'श्रद्धा-आफताब' से सीखो,
ऐसा हर आचरण रोक दो!
वृत्ति-आसुरी और राक्षसी,
करना सीता-हरण रोक दो!
हरी-भरी हो धरती सारी,
दूषित पर्यावरण रोक दो!
कवियों! ऐसी कलम चलाओ,
मानवता पर ग्रहण रोक दो!
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*लिव-इन को है मिली मान्यता,फिर क्यों रोना-धोना*
साथ-साथ रहना खाना है, पाणिग्रहण बिन सोना।
संस्कृतियों का क्षरण यही है, संस्कार का खोना।
संबंधों के पैंतिस टुकड़े, कर जंगल में बोना।
लिव-इन को है मिली मान्यता, फिर क्यों रोना-धोना।।
छोड़ दिए तुम मात-पिता को, कथित प्रेम में पड़कर।
अनजानी राहों के राही,बने हुए हो भगकर।
कैसे भूल गए घर सुंदर, अपना सुखद सलोना।
लिव-इन को है मिली मान्यता, फिर क्यों रोना-धोना।।
माना प्रेम सरस होता है, पर जब पावन होता।
गंगा जल- सा प्रेमी जन का, तन-मन सदा भिंगोता।
देह-यष्टि का आकर्षण तो,मात्र मोह का होना।
लिव-इन को है मिली मान्यता, फिर क्यों रोना-धोना।।
प्रेमपाश में अगर फँसाने, लव-जेहादी आएँ।
सावधान तुम रहो बेटियों!, तुमको लुभा न पाएँ
भौतिकता की आँधी में मत, अपना आपा खोना।
लिव-इन को है मिली मान्यता, फिर क्यों रोना-धोना।।
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पद्मभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ जैसे अनगिनत पुरस्कार प्राप्त महान कवि सुमित्रानंदन पंत को हिंदी में ‘वर्ड्सवर्थ’ कहा जाता है। उनके बिना हिंदी साहित्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती। साथ ही, हिमालय की ओट में छिपे कौसानी जैसे छोटे से गांव को अपनी रचनाओं के माध्यम से विश्व मानचित्र पर जगह दिलाने का काम यदि किसी ने किया है तो वो पंत जी ही थे। आज उनकी एक कविता की ये पंक्ति
*कूटने से बढ़ती है -इम्युनिटी पॉवर* *दादा जी से पूछा* *कि पहले लोग बहुत कम* *बीमार होते थे ?* *तो...