सोमवार, 6 जून 2022

सरकारी कामकाज

 *परम्परायें कैसे बनती हैं ?* 🤔🙄🧐😳


प्रस्तुति -प्रदीप कुमार  


एक कैम्प में नए कमांडर की पोस्टिंग हुई....

इंस्पेक्शन के दौरान उन्होंने देखा कि कैम्प एरिया के मैदान में दो सिपाही एक बैंच की पहरेदारी कर रहे हैं.....😄

कमांडर ने सिपाहियों से पूछा कि वे इस बैंच की पहरेदारी क्यों कर रहे हैं ? 

🙄

सिपाही बोले:- हमें पता नहीं सर, लेकिन आपसे पहले वाले कमांडर साहब ने इस बैंच की पहरेदारी करने को कहा था.....

😄

शायद ये इस कैम्प की परंपरा है क्योंकि......

शिफ्ट के हिसाब से चौबीसों घंटे इस बैंच की पहरेदारी की जाती है.... 

😄

वर्तमान कमांडर ने पिछले कमांडर को फोन किया और उस विशेष बैंच की पहरेदारी की वजह पूछी.....? 

😎

पिछले कमांडर ने बताया:- मुझे नहीं पता, लेकिन मुझसे पिछले कमांडर उस बैंच की पहरेदारी करवाते थे.......

अतः मैंने भी परंपरा को कायम रखा..... 

😄

नए कमांडर बहुत हैरान हुए....

😎

उन्होंने पिछले के और पिछले-पिछले 3 कमांडरों से बात की......

😎

सबने उपरोक्त कमांडर जैसा ही जवाब दिया....

😎

यूं ही पीछे के इतिहास में जाते नए कमांडर की बात फाइनली एक रिटायर्ड जनरल से हुई जिनकी उम्र 100 साल थी.....

😎 

नए कमांडर उनसे फोन पर बोले:-

आपको डिस्टर्ब करने के लिए क्षमा चाहता हूं सर.....

मैं उस कैम्प का नया कमांडर हूं......

जिसके आप, 60 साल पहले कमांडर हुआ करते थे...😄

मैंने यहां दो सिपाहियों को एक बैंच की पहरेदारी करते देखा है.....😄 क्या आप मुझे इस बैंच के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं....?ताकि मैं समझ सकूं कि, इसकी पहरेदारी क्यों आवश्यक है....? 

😄😄

सामने वाला फोन पर आश्चर्यजनक स्वर में बोला:-

*क्या ? उस बैंच का  "ऑइल पेंट" अभी तक नहीं सूखा........?*

😄😄😄😀😀😁😁😉

ज्यादा तो नहीं, भारत में सिर्फ़ 75% परम्परायें ऐसे ही बनी हैं !😜

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