शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

प्रेम_कविताएँ_लिखना_साहस_का_काम_है 💙💙 पंकज मित्र

 #वैलेंटाइन_वीक ...

Day - 6 🤭🤭🤭🫂🫂🫂


 प्रवीण परिमल की कविताएं


प्रेम कविताएँ लिखना साहस का काम है / पंकज़ मित्र 

💙    


 


 ... प्रेम का और इंकलाब का, फ़ैज़ साहब से बड़ा कोई शायर नहीं हुआ , इस पूरे एशिया महाद्वीप में। 

     प्रेम की तारीफ़ में जहाँ भाई प्रवीण परिमल ने पूरी किताब लिख दी है, वहीं फ़ैज़ साहब कहते हैं, "मुझसे पहली- सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग!" 

    जिस वक़्त में फ़ैज़ साहब ये लिख रहे थे, वो वक़्त भी वैसा ही था, जैसा आज है। लेकिन अभी का जो वक़्त है, वह उससे ज़्यादा कहीं क्रूर और उससे ज़्यादा कहीं कठिन है। और ऐसे समय में, प्रेम पर एक पूरी किताब लिख देना, यह बहुत बड़े साहस का काम है।  

   आज का जो दौर है, उसमें मोहब्बत के तरह- तरह के रंग हम देख रहे हैं। कोई कहता है कि आप अपने राष्ट्र से मुहब्बत कीजिए और जबरदस्ती आपको बताता है कि राष्ट्र से मुहब्बत कैसे करनी चाहिए। गोया कि आपको पता ही न हो कि राष्ट्र से मुहब्बत कैसे की जाती है।

    बहुत सारे आईटी सेलवाले हैं जो अपने आक़ा से मुहब्बत करते हैं और वो बताते हैं आपको, लिख- लिखकर और तमाम तरह की चीज़ें सोसल मीडिया पर डालकर, कि आपको भी उस शख़्सियत से मुहब्बत करनी चाहिए, जो कि पूरी तरह से अपने भाइयों और किसानों और तमाम लोगों के प्रति नफ़रत से भरा हुआ है। तो फ़ैज़ साहब वैसे ही दौर में कहते हैं कि मुझसे पहली- सी मुहब्बत मेरे महबूब न माँग! 

     बहुत कुछ स्थिति वैसी ही है अभी। लेकिन इस तरह के वक़्त में भी, इस क्रूर और कठिन समय में mभी प्रेम की बातें करना, प्रेम- कविताएँ लिखना, निश्चित रूप से प्रतिरोध का एक तरीक़ा तो है ही। ऐसे माहौल में प्रवीण परिमल भी कहते हैं ---


"दग्ध मन की वेदना ही हूँ नहीं जब भूल पाता, 

तुम कहो, कैसे विरह में मैं प्रणय के गीत गाऊँ!"

 

   इसको जब आप बड़े परिप्रेक्ष्य में देखेंगे, तो प्रवीण परिमल भी प्रकारांतर से वही बात कह रहे हैं। 

    प्रवीण परिमल के प्रेम का रंग नीला है। नीला रंग प्रतीक है उन्मुक्तता का, खुलेपन का, आज़ादी का। नीला आकाश होता है। नील एक बहुत बड़ी संख्या है जो कुबेर के धन को व्याख्यायित करती है। तो एक ऐसा अपरिमित विस्तार हो जिस प्रेम में, उसका रंग नीला ही हो सकता है।

  आज के इस मुश्किल वक़्त में, इस क्रूर समय में भी प्रेम साँस लेता रहे, इसके लिए ज़रूरी है कि 'प्रेम का रंग नीला' जैसे संग्रह आते रहें।


(13.2.2021 को लोकार्पण समारोह में दिए गए वक्तव्य का अंश)


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