शुक्रवार, 20 जनवरी 2023

एक दिन आऊँगा... / जावेद अख़्तर

 मोहब्बत वालों ने, हमारे यारों ने

हमें ये लिखा है कि हमसे पूछा है

हमारे गाँव ने, आम की छाँव ने

पुराने पीपल ने, बरसते बादल ने

खेत खलिहानों ने, हरे मैदानों ने

बसंती बेलों ने, झूमती बेलों ने

लचकते झूलों ने, दहकते फूलों ने

चटकती कलियों ने

और पूछा हैं गाँव की गलियों ने

के घर कब आओगे

के घर कब आओगे

लिखो कब आओगे

कि तुम बिन गाँव सूना सूना है

संदेशे आते हैं... 


ऐ गुज़रने वाली हवा ज़रा

मेरे दोस्तों, मेरी दिलरुबा,

मेरी माँ को मेरा पयाम दे

उन्हें जा के तू ये पयाम दे

मैं वापस आऊँगk

मैं वापस आऊँगा

फिर अपने गाँव में

उसी की छाँव में

कि माँ के आँचल से

गाँव के पीपल से

किसी के काजल से

किया जो वादा था वो निभाऊँगा

मैं एक दिन आऊँगा... 


[जावेद अख़्तर]

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