रविवार, 7 जून 2020

गवाही / सीमा मधुरिमा





लघुकथा ----

शीर्षक ...गवाही

" सच सच कहना ...क्या तुमने सच में मुझसे प्यार किया था ," उसने पूछा .....वो लड़का चिल्लाया  , " उफ्फफ्फ्फ़ चली जाओ मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ....मुझे अफ़सोस है जो कुछ भी मैंने तुम्हारे साथ किया " उस लड़की की आवाज़ तेज हो गयी .  " क्यों ...मुझे देखो ...तुम तो मुझसे प्रेम करते हो न ??
तुम मेरी एक झलक पाने के लिए मीलों मेरा पीछा करते थे ....मुझसे तुमको बहुत सारी बातें करनी थी ....यही कहलाया था न तुमने कई लोगों के माध्यम से ....करो मुझसे बातें देखो मुझे और झाँको मेरे उस चेहरे को गौर से जो तुम्हारे फेंके तेज़ाब से बिलकुल वैसा ही बन गया है जैसा घिनौना तुम्हारा प्रेम था , "
" नहीं नहीं .....तुम ....प्लीज् यहाँ से जाओ ....तुम कभी नहीं समझ सकती कि मैं तुमसे कितना प्यार करता था ...तुम्हारे लिए मैं कुछ भी करता पर तुमने ....तुमने तो कभी मेरी कोई बात ही नहीं सुनी ....तुम ...कभी मुझे सुनना ही नहीं चाहती थीं ....मैं अपनी बात कैसे कह पाता ....और फिर ज़ब मैंने तुमको ...उस कमीने के साथ उसकी मोटर साइकिल पर देखा तो मेरे अंदर जो आग लगी मैं उसे बता नहीं सकता ....फिर मैंने सोच लिया कि अगर तुम मेरी नहीं तो किसी और की भी न होने दुँगा ...और मैं कब और कैसे ये हरकत कर बैठा समझ ही नहीं पाया .....हो सके तो मुझे माफ़ कर देना ....हालाँकि मेरा कृत्य माफ़ी लायक नहीं ....अब तुम प्लीज् यहाँ से जाओ ...ये जगह केवल अपराधियों के लिए है ....और हाँ तुम्हारे बच जाने के लिए मैंने बहुत प्रार्थना की है ...मुझे ज़ब होश आया इस घटना के बाद तो मैं बहुत रोया और खुद को पोलिस सुपुर्द कर दिया क्योंकि ज़ब तक मैं अपने किये की सजा नहीं भुगत लूँ मुझे नींद नहीं आएगी ....तुम जाओ ....तुम जाओ ,"
वो लड़की बोली ..." जा रही हूँ ...मैं केवल तुमको तुम्हारा दिल और प्रेम दिखाने आयी थी ....अस्पताल में मेरा एक महीना कैसे गुजरा मैं ही जानती हूँ ....और जिस कमीना बोल रहे हो वो दीपक केवल मेरा मित्र था ...पर इस एक महीने में उसका मेरे प्रति समर्पण और प्रेम देखकर मैं सच में उससे जुड़ गयी ....और वो मुझसे इस बदसूरत चेहरे के साथ ही विवाह करने का तैयार है .....सोचो ....मेरे साथ तुम्हारा प्रेम ....इस बदसूरत चेहरे के रूप में अपनी गंदगी की गवाही देगा ....तुम मुझसे नहीं मेरे उस चेहरे से प्रेम करते थे जिसपे तेज़ाब डालकर तुमने खत्म कर दिया ,"
वो और तेज चीख उठा .," चली जाओ ," " दुबारा कभी यहाँ मत आना .....हाँ मेरा प्रेम गंदा था तभी तो मुझे शैतान बना दिया .....जाओ ईश्वर तुम्हे दीपक के साथ खुश रखे "
" मिलने का समय खत्म हुआ "
एक तेज आवाज़ के साथ जमीन पर एक डंडा पटकते हुए हवलदार चिल्लाया !!

सीमा"मधुरिमा"
लखनऊ !!




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