गुरुवार, 28 जनवरी 2021

विकिलीक्स के संस्थापक और संचालक / आलोक तोमर

खगोलीय साहस का एक नया नाम /  आलोक तोमर 

विकिलीक्स के संस्थापक और संचालक जूलियन असांजे ने ब्रिटिश अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, उन्हें जमानत नहीं मिली और स्वीडन जा कर वे अपने खिलाफ लगाए गए बलात्कार के आरोपों का सामना करेंगे। इसी बीच विश्व विख्यात टाइम पत्रिका ने जूलियन को मैंन ऑफ द ईयर घोषित करने की तैयारी कर ली है। 

टाइम मैग्जीन में इंटरनेट पर अपने पाठकों के बीच जो सर्वेक्षण करवाया उसमें दूसरों से बहुत ज्यादा वोट जूलियन असांजे को मिले। अभी तो यह पता नहीं हैं कि जूलियन असांजे ने अपनी गिरफ्तारी या मौत के बाद रखे हुए बहुत सारे विस्फोटक दस्तावेज जारी होने का जो ऐलान किया था उसका क्या हो रहा है मगर टाइम मैग्जीन के इतिहास में पहली बार किसी अभियुक्त को मैन ऑफ द ईयर या वर्ष का व्यक्तित्व माना गया है। 

जूलियन असांजे ने धमकी दी थी कि उन्होंने पहले से एक गीगाबाइट की एक फाइल इंश्योंरेंस डॉट 256 के नाम से इंटरनेट पर चढ़ा रखी है और इसका 256 अक्षरों और अंकों का पासवर्ड है। उन्होंने कहा था कि कुछ हुआ तो यह पासवर्ड सार्वजनिक कर दिया जाएगा और इसमें जो रहस्य छिपे हुए हैं वे सामने आने के बाद अमेरिका को मुंह दिखाना मुश्किल हो जाएगा। 

असांजे ने दुनिया भर के इंटरनेट विशेषज्ञों को इस बात की चुनौती भी दी थी कि अगर वे इस पासवर्ड का पता लगा पाएं तो लगा लेें। खुद दुनिया के सबसे योग्य इंटरनेट इंजीनियरों का कहना है कि जो पासवर्ड खुद किसी दूसरे पासवर्ड से सुरक्षित होते हैं उनका पता लगा पाना सौ डेढ़ सौ साल लगा देगा। जूलियन असांजे ने यह पासवर्ड अपने एक विश्वासपात्र के पास रखा है जो एक बटन दबाएगा और सारी सामग्री विकिलीक्स पर आ जाएगी।

हाल ही में विकिलीक्स पर जूलियन असांजे ने लिखा था कि पूरी दुनिया में एक लाख से ज्यादा लोग जो रहस्य जानते हैं, उनकी मदद कर रहे हैं और हमारे भंडार में पूरी दुनिया की बहुत सारी सामग्री है। इससे अच्छाई की जीत होगी। इतिहास में विश्व एक और अच्छी जगह बनेगा। आम तौर पर टाइम पत्रिका ने समाज में बड़े योगदान करने वालों को ही सम्मानित करती है और किसी अमेरिका से ही प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका के लिए यह बड़े साहस की बात कही जाएगी कि अमेरिकी सरकार से सीधे टक्कर और वह भी एक विदेशी नागरिक के लिए ले रहा है। 

जूलियन असांजे ने किया तो वही है जिसे करने की कल्पना कोई भी आम और सताया हुआ नागरिक कर सकता है। मगर साहस नहीं होता। जाहिर है कि जूलियन असांजे के लिए यह फैसला भी आसान नहीं रहा होगा। लेकिन ब्रिटेन में समर्पण करने के उनके फैसले से बहुत लोगों को पहले पहल तो आश्चर्य हुआ होगा। लेकिन अगर सही संदर्भों में देखे तो असांजे ने फैसला गलत नहीं किया। अमेरिका और उसके दूसरे कातिल दोस्त देश जिस तरह उनके पीछे पड़ गए थे उसमें जान चली जाना सबसे आसान था। बहुत सारे रहस्यों को सीने में दबा कर जूलियन नहीं जाना चाहते। ब्रिटिश कानून में प्रतिशोध के लिए कोई जगह नहीं हैं और ब्रिटेन के खिलाफ कोई बड़ा खुलासा विकिलीक्स पर नहीं किया गया। इसलिए जाहिर है कि जूलियन को ब्रिटेन ही सबसे ज्यादा सुरक्षित जगह लगी होगी। 

ब्रिटिश अदालत में जब वे पेश हुए तो उन्हें समझ में आया कि उनका फैसला गलत नहीं था। अदालत में उन्हे बाकायदा इस बात की सफाई देनी पड़ी कि आखिर उन्होंने ब्रिटेन में ही आत्मसमर्पण करने का फैसला क्यों किया? उन्होंने सरेआम कहा कि उन्हें ब्रिटेन सबसे ज्यादा सुरक्षित लग रहा था। जब उन्हें यह बताया गया कि स्वीडन पुलिस की शिकायत पर बलात्कार के मामले में उनके खिलाफ इंटरपोल का वारंट हैं और उन्हें स्वीडन प्रत्यर्पित किया जा सकता है। जूलियन ने सिर्फ यही जवाब दिया उन्हें पता है लेकिन वे कानूनी रूप से अपना बचाव करेंगे और कानून को चुनौती भी देंगे। 

अदालत ने जब उनसे पूछा कि अमेरिका से क्या वाकई उनका कोई बैर है तो उन्होंने कहा कि वे किसी देश के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वहां बैठ कर मानवता के खिलाफ काम कर रहे लोगों के खिलाफ है। ये लोग कितने भी ताकतवर हों और उन्हें चाहे जितना नुकसान पहुंचा सकते हो, जूलियन ने कहा कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी। जूलियन असांजे ने यह भी कहा कि पूरी दुनिया में बहुत सारे उनके शुभचिंतक बन गए हैं और वे किसी भी देश की सरकार को मनमानी नहीं करने देंगे। 

यह तो कोई अनाड़ी और अनपढ़ भी बता देगा कि स्वीडन में अचानक जूलियन असांजे पर जो बलात्कार और व्यभिचार के आरोप लगाए गए हैं वे निरर्थक हैं और सिर्फ लगाने के लिए लगाए गए हैं। इन्हें सिद्व करना भी आसान नहीं होगा। लेकिन जब कानून अपनी चलाने पर उतर आता है तो जाहिर है कि उस पर किसी का वश नहीं चलता। यहां तो कानून बाकायदा अंधा हो गया हैं और कोई नहीं समझ पा रहा कि आखिर यह कानून किसी तर्क के आधार पर चल भी रहा है या नहीं। 

सबसे विचित्र बात तो यह है कि सबसे ज्यादा मानवाधिकाराें का गाना अमेरिका ही गाता है और अफगानिस्तान और इराक की अपनी लड़ाई को पूरी दुनिया से आतंकवाद खत्म करने का नाम लेता है। विकिलीक्स ने कम से कम इतना तो किया कि दुनिया को यह एहसास दिलाया कि अमेरिका जैसी महाशक्ति भी किसी नागरिक के साहस और इच्छाशक्ति के सामने निरापद नहीं है। अब चूकि पूरी दुनिया की निगाह जूलियन असांजे के मामले पर है इसलिए उन्हें एक चुटकी बजा कर अदृश्य नहीं किया जा सकता और न सद्दाम हुसैन की तरह उन्हें फांसी पर चढ़ाया जा सकता है। 

आखिर पूरी दुनिया में विकिलीक्स की तरह ही हर देश की एक भंडाफोड़ वेबसाइट ऐसे ही रजिस्टर नहीं हो गई। जूलियन असांजे के साथ चाहे जितना अत्याचार कर लिया जाए लेकिन सच यही है कि उन्होने दुनिया को प्रतिरोध और सरकारी तानाशाही रोकने का एक और रास्ता बताया है और इससे एक खगोलीय साहस सामने आया है जो अब सारे सरकारों को और तानाशाहों को भी डराती और सच के बुरे सपने दिखाती रही थी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विश्व में हिंदी : संजय जायसवाल

  परिचर्चा ,  बहस  |  2 comments कवि ,  समीक्षक और संस्कृति कर्मी।विद्यासागर  विश्वविद्यालय ,  मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर। आज  दुनिया के ल...