शनिवार, 11 जुलाई 2020

कल्लू मामा का इश्क़ / सुभाषचंदर





(जनसंदेश टाइम्स में हास्य रचना कल्लू मामा का इश्क़ उर्फ कल्लू मामा ज़िंदाबाद )

 कल्लू मामा का इश्क़ उर्फ कल्लू मामा  ज़िंदाबाद

सुभाष चंदर


सयाने कहते है कि हर बंदे को अपनी इच्छा से अपनी जिन्दंगी बर्बाद करने का हक है। बस उसके पास इसके लिए भरपूर इच्छाशक्ति होनी चाहिए।कल्लू मामा के पास इसकी कतई कमी ना थी। इसी इच्छाशक्ति का कमाल था कि वह पिछले लगातार दस वर्षो से एक अदद इश्क  करने पर आमादा थे।इस सपने को पूरा करने में कल्लू मामा ने दिल से लेकर जेब तक का सारा जोर लगा दिया था।  लगभग तीन दर्ज़न कन्याओ से उन्होंने प्रेम निवेदन किया था। उनमे से दो दर्जन ने स्वयं अपने नाजुक हाथों से या फिर अपनी ऊँची ऐड़ी की चप्पलो से उनके इश्क की मरम्मत की तो कुछेक के भाई-बापों ने अपनी लाठियों-हाकियो से यह काम सम्पन्न किया । इन प्रकरणों में उनकी तीन बार पसली टूटी ,चार बार दांत टूटे, जबकि पैर की हड्डी सिर्फ एक बार ही टूटी ।इतना कुछ हुआ  पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी । चूंकि गांव में प्रेम वगैरह की संभावनाएं कम और पिटने की संभावनाएं ही ज्यादा थीं सो कहीं बात नहीं बनी। ।हारकर  उन्होंने बाबा की जेब से  नोट और मां के संदूक से कुछ गहने कम किए और सीधे वह  मुंबई में अपने मित्र रग्घू की शरण में  आ गए । उसे अपनी सारी  रामकहानी सुनाई।  सुनकर रग्घू गंभीर हो गए।चूंकि गंभीरता  के माहौल में  शरीर में निकोटिन की कमी हो जाती है, सो उन्होंने  एक बीड़ी सुलगाई ,धुँआ उगला । फिर वह  बोले,”सुनो भाई कल्लू  ! तुम्हारे मर्ज़ की एक ही दवा है,वो है फेसबुक। उसी से तुम्हारा कल्याण होगा। पर फेसबुक चलाने को कम्प्यूटर सीखना पड़ेगा । बोलो,तैयार हो ? सुनते ही कल्लू  किलककर बोले,’  बिल्कुल।
अगले दिन से ही कल्लू अपनी ड्यूटी के बाद कंप्यूटर सीखने जाने लगे । सिर्फ दस दिनों में कड़ी मेहनत और पक्के इरादे  के साथ उन्होंने इतना कम्प्यूटर सीख लिया कि फेसबुक चला  सके ।बस उसी रात से उन्होंने फेसबुक में जितनी लड़कियों की तस्वीर दिखी, उन सबको फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी । तीन –चार दिन में दर्ज़न भर कन्यायें उनकी फ्रेंड बन गई।
अब वह रात के तीन-तीन बजे तक या तो फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते या फिर चैटिंग का जुगाड़ बिठाते । एक रात को एक घटना घटी । उन्होंने जैसे ही फेसबुक खोला । चैट बाँक्स में मिस शालू नज़र आई । वह उनकी नई –नई फेसबुक दोस्त बनी थी । कल्लू उन्हें देखते ही खिल गए । वाकई शालू रानी की खूबसूरती चकाचक थी –सेब से लाल गाल ,जामुन जैसी काली भूरी आंखे संतरे की फांको जैसे रसभरे होंठ । लड़की क्या थी पूरी फलों की दुकान थी । कल्लू देखते ही फ्लेट हो लिये
उधर कन्या ने चैट बॉक्स पर लिखा ।
“कल्लू जी ,मुझे आप बहुत अच्छे लगते है ,क्या मैं आपको अच्छी लगती हूं।  कल्लू पढ़ते ही चकरा  गए।होश में आते ही फिर चैटिंग के मैदान में कूद पड़े।
कुछ देर कल्लू उसकी  और वह कल्लू की तारीफ करती रही । उसके बाद कल्लू ने मिस शालू से मिलने की इच्छा जताई ।
पर शालू ने इस सम्बन्ध में अपनी विवशता दिखा दी ।लिखा कि वह अभी उन्हें परखने में कुछ समय और लेना चाहती है । फिर पुच पुच का एक  दौर हुआ और शालू जी रुखसत हो गई ।
उस रात कल्लू के सपने में सिर्फ शालू जी आई ।  सपने में  उन्हें अपनी सुहागरात का दृश्य दिखा,जिसमे वह शालू जी का घूंघट उठा रहे थे । अगली रात को शालुजी फिर चैट बॉक्स में आई ।इस बार प्रेम को थोड़ा और विस्तार मिला । कल्लू इससे ज्यादा सयंम नहीं रख सकते थे । उन्होंने शालू जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया ।  उसे शालू जी ने दो मिनट के अंतराल के बाद स्वीकार कर लिया । कल्लू के दिल के बैण्ड-बाजे बज गए।
कल्लू ने एक बार फिर मिलने के लिए बोला ,मगर शालू जी ने प्रेम की कसमे दोहराते हुए मिलने की मजबूरी भी दोहरा दी। उसके बाद  उन्होंने जालिम ज़माने के बैरी होने आदि के साथ  घर की गरीबी की मज़बूरी भी दोहरा दी । बड़े सयंम से कल्लू ने  उसका श्रवण किया । शालू जी बताया उनके घर में पैसे की इतनी किल्लत  है कि वह एक अच्छी जींस और शर्ट तक नहीं खरीद पा  रही है । हे राम ,इतनी गरीबी । कल्लू सच में  द्रवित हो गए । उसके बाद  उन्होंने शालू जी का एकाउंट नम्बर माँगा। उन्होंने थोड़ी मशक्कत के बाद अपने भाई का नम्बर दे दिया। कहना न होगा कि अगले ही दिन कल्लू ने अपनी तनख्वाह में से दो हज़ार रुपये शालूजी के भाई के खाते में ट्रान्सफर कर दिए ।
इसके बाद तो रुपयों के ट्रान्सफर के साथ साथ प्यार की कीमते भी आसमान छूने लगी । हद तो यहाँ तक हो गयी कि कल्लू की सारी तनख्वाह शालू जी के प्रेम में काम आने लगी। हालात इतने बढ़िया हो गए किएक दिन शालू जी की गरीबी दूर करने के कल्लू रग्घू के सामने हाथ फैलाने पहुंच गए ।
जब कल्लू ने रग्घू से पैसे मांगे तो रग्घू चकित रह गए।  उनका माथा जो था वह  ठनक गया । उन्होंने कल्लू को ऊँच-नीच समझाने की कोशिश की ।लड़की पर विश्वास न करने की सलाह दी ।पर कल्लू उखड़ गये उन्हें सब मंजूर था,पर कोई उनकी प्राण-प्यारी पर आरोप लगाये यह मंजूर नहीं  था । वह रग्घू पर गर्म हो गए ।  घबराकर  रग्घू ने उन्हें पांच सौ रुपये उधार दे दिए ।
 कल्लू के जाने के बाद रग्घू  को चिंता ने आ घेरा । उन्होंने सोच लिया कि वह अब परम मित्र कल्लू को अब और लुटने नहीं देंगे ।यह फैसला करके वह दफ्तर गए । साथियों से बातचीत की । बस अगले दिन से प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया ।पहले राउंड में गणेशन ने कल्लू से शालू जी के फेसबुक एकाउंट की थाह ली  ।डेविड ने उनसे शालू जी के भाई का एकाउंट नम्बर निकलवाया । सारा डाटा डाला कम्प्यूटर में  तो पता चला कि शालू के भाई करमचंद कुलकर्णी नागपुर  में रहते है इलाहाबाद बैंक में उनका खाता  है ।
अगले ही दिन रग्घू गणेशन और डेविड के साथ नागपुर पहुंचे । बैंक मैनेजर को सारी कहानी सुनाई। उनसे कुलकर्णी का पता लिया । पहुंचे कुलकर्णी के घर। घर पर ताला लगा था । पड़ोसियों से पुछा तो पता चला की कुलकर्णी  दिन भर घर में रहते है । कंप्यूटर पर कुछ काम करते रहते है । शालू रानी के बारे में पूछने पर पता चला  कि कुलकर्णी साहब की शालू रानी तो क्या कोई भी बिटिया नहीं है ,क्योकि वह तो अभी तक कुंआरे हैं । सब चौंक गए । मामला समझ में आ गया ।
रग्घू के नेतृत्व में जाँच दल  लौट आया । कल्लू को पूरी शालू कथा सुनाई। बताया कि  कुलकर्णी मुर्ख बनाकर पैसे ऐंठ रहा है । उन्होंने कुलकर्णी पर केस करने की सलाह दी ,पर कल्लू उखड़ गए । उन्होंने रग्घू को धक्के मारकर घर से  निकाल दिया । भला वह उनकी प्राण प्यारी शालू के न होने की बात पर कैसे विश्वास करते ? उन्होंने प्रेम की पुष्टि के लिए फेसबुक   खोला तो पता चला कि शालू जी तो अंतर ध्यान हो चुकी थी । उन्होंने कई लोगो से चर्चा  की, कम्प्यूटर को मैकनिक को भी दिखाया, पर शालू जी  तब भी प्रगट नहीं हुई ।
उस दिन वह खूब रोये । रोते रोते भी उन्होंने रग्घू को ही कोसा ,क्योकि उसी की गलती के कारण उन्हें शालू जैसी खूबसूरत लड़की गंवानी पड़ी थी ।
मोबाइल -9311660057

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