शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

सुदीप की बात निराली / हरीश पाठक

 सुदीप

       जन्म:1 अप्रैल,1942 गोजरा मंडी,          फैसलाबाद(पाकिस्तान)

       मृत्यु:25 जून,2020 (मुम्बई)


गुलशन अरोड़ा (सुदीप) हिंदी कहानी के वे अप्रतिम कथाकार थे जहाँ जीवन अपनी कुरूपता और सुंदरता दोनों रँगों में धड़कता था।वे समानान्तर कहानी आंदोलन के केंद्रीय पात्र थे।

     वे हिंदी के महत्वपूर्ण संपादक थे।सारिका,धर्मयुग,रविवार, शिक,सन्डे मेल,हमारा महानगर और अमर उजाला के संपादकीय विभाग से सम्बद्ध रहे सुदीप के अंतहीन,तीये से अट्ठा, लँगड़े कहानी संग्रह व साधु सिंह परचारी ,नीड़ व मिट्टी के पाँव जैसे बहुचर्चित उपन्यास आज भी हिंदी साहित्य में अपनी अलग जमीन रखते हैं।

      हिंदी के इस बेहतरीन कथाकार,उपन्यासकार,सम्पादक की आज जयंती है।यदि वे होते तो हम आज उनका 80वां जन्मदिन मना रहे होते।

      जयंती पर सादर नमन मेरे प्रिय कथाकार और मेरे पथ प्रदर्शक।आपको हर पल,हर क्षण याद करते हैं,करते रहेंगे-हम लोग।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विश्व में हिंदी : संजय जायसवाल

  परिचर्चा ,  बहस  |  2 comments कवि ,  समीक्षक और संस्कृति कर्मी।विद्यासागर  विश्वविद्यालय ,  मेदिनीपुर में सहायक प्रोफेसर। आज  दुनिया के ल...