शनिवार, 2 अप्रैल 2022

रात का (के) रिपोर्टर निर्मल वर्मा /


प्रस्तुति - हिंदी विभाग

मगध विवि, गया  बिहार


कल 3 अप्रैल को हिन्दी के महान रचनाकार निर्मल वर्मा का जन्मदिन है। इस अवसर पर शिमला में जन्मे  इस लेखक पर देश में कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होने हैं। पहाड़, एकांत, यूरोप, भारतीय संस्कृति और दर्शन का जैसा गहरा और अनोखा वितान हमें निर्मल जी के यहाँ नज़र आता है, वह दुर्लभ है। इस वितान को वे जिस सहज, प्रवाहमय और काव्य रूपी गद्यभाषा में अभिव्यक्त करते हैं, वह  अद्वितीय है। मार्क्सवाद से लेकर भारतीय संस्कृति के गहन आख्यान तक, उनकी विचारधारा निरन्तर संशोधित और संवर्धित होती रही है।


नई कहानी आंदोलन के संदर्भ में उनकी कहानी 'परिंदे' मील का पत्थर मानी जाती है। 'माया दर्पण' कहानी पर इसी नाम से 1972 में एक फ़िल्म बनी जिसे फ़िल्मफ़ेअर का सर्वश्रेष्ठ क्रिटिक्स चॉइस पुरस्कार मिला। 'डायरी का खेल', 'लन्दन की एक रात', 'सितंबर की एक शाम' जैसी कहानियां हों या 'लाल टीन की छत', 'अंतिम अरण्य' और 'वे दिन' जैसे तमाम उपन्यास, कथा कहने के ढंग को निर्मल जी ने अभूतपूर्व रूप से बदला। प्रतीक और वातावरण की आधुनिक हिन्दी कथा-साहित्य में भूमिका सम्बन्धी कोई भी अध्ययन निर्मल के बिना पूरा नहीं होगा। उनके निबन्ध, रिपोर्ताज और यात्रा-संस्मरण भी एक अनिवार्य अध्ययन की मांग करते हैं।


हिन्दी खड़ी बोली के वैभव को कम समय में प्रतिष्ठित करने में निर्मल वर्मा का नाम हमेशा अग्रगण्य रहेगा। साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ, पद्म भूषण, Lettre Ulysses (Berlin) और Chevalier de l'ordre des arts et des lettres (France) जैसे तमाम पुरस्कार उनकी अंतरराष्ट्रीय छाप को अभिव्यक्त करते हैं। बारम्बार नमन।

प्रस्तुति - हिंदी विभाग

मगध विवि, गया  बिहार


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