सोमवार, 10 जनवरी 2022

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस 😊/ सीमा मधुरिमा

 विश्व हिंदी  दिवस पर खास 

==========================



मैं पतिदेव से," सुनो आज अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस है... इसलिए बहुत-बहुत बधाई!"


पतिदेव," बिल्कुल... तुम को भी बहुत-बहुत बधाई... खासकर उन साहित्यकारों को भी बधाई मेरी तरफ से दे देना... जो आज अपनी अपनी वॉल पर बड़े-बड़े पोस्ट लिखेंगे... और बड़े-बड़े दर्शन की बातें करेंगे हिन्दी को लेकर..."


मैं ," क्या मतलब है आपका... बड़ी-बड़ी बातें करने से क्या मतलब है... आज वो साहित्यकार हैं... तो हिंदी बची हुई है..."


पतिदेव," हां तभी तो कहा , उनके ही बल पर हिंदी बची हुई है...कभी दो-चार के घर भी चली जाना... और देखना...उनके खुद के बच्चे बड़े-बड़े कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ रहे होंगे.. और अगर कहीं हिंदी में बात कर लिया... या अभिवादन कर लिया... तो तुम्हारे यही  साहित्यकार उनको वहीं टोक देंगे... क्योंकि इससे इनकी इज्जत कम होती है... और अगर कहीं इनके बच्चे बहुत बड़े स्कूल में होंगे... तो यह बात कम से कम आपको चार बार बताएंगे...क़ी किस स्कूल में मेरा बेटा है... या फलां स्कूल में मेरी बेटी है...और साथ में यह भी बताएंगे... क़ी उस  स्कूल में बड़े-बड़े मंत्री और ऑफिसर के बच्चों का भी एडमिशन नहीं होता.... यह मेरी किस्मत है कि मेरे बच्चे का एडमिशन वहां हो गया,"


मैं," हे भगवान!

 अभी 2 दिन पहले ही अपनी एक सहेली के यहाँ गई थी... बिल्कुल ऐसा ही हुआ था....आपको कैसे पता.."


पतिदेव," किसी एक की बात नहीं कर रहा हूं...सभी का यही हाल है.. अगर आपके बच्चे किसी नजदीक के छोटे स्कूल में पढ़ रहे होंगे...तो आपको ऐसी दृष्टि से देखेंगे... जैसे दुनिया के तमाम अपराध आप ही ने कर दिए हों... और अगर कहीं उनके बच्चे विदेश में जाकर सैटल हुए हों... तो उनका गुणगान ऐसे करेंगे... जैसे चांद सितारे तोड़ लिए गए हों... विदेश से आए नाती पोतों को... आपके समक्ष ऐसे पेश करेंगे... और उनकी हिंदी ना जानने पर गर्व से बताएंगे... जैसे इसी छोटी उम्र में कोई बड़ी पीएचडी कर ली हो...दुनिया ऐसी ही है.... अब  दिवस विशेष पर याद रहती हैं यह बधाई वाले चोचले.."

" ओके... अगर तुम्हारी बात पूरी हो गई हो.... तो  लेट्स हैव अ टी...वेदर इज वैरी कूल टुडे....


मैं," अच्छा अब आप शुरू भी हो गये....हुँह.. क्या समझते हो अंग्रेजी में बोल दोगे तो मैं चाय बना दूंगी.... मैं वही हूं... अंग्रेजी में सुनकर बदल नहीं जाऊंगी....जल्दी बनाओ चाय ठंडी लग रही है...और हाँ   ब्लोअर.ऑन कर देना....बड़े आये!"


सीमा मधुरिमा" 

लखनऊ!!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रवि अरोड़ा की नजर से....

 आपने कभी देखी / रवि अरोड़ा किसी फिल्म का तो याद नहीं मगर जहां तक साक्षात दर्शन की बात है तो मुझे अभी तक लैंबोर्गिनी कार के दीदार नहीं हुए ।...