मंगलवार, 9 नवंबर 2021

अनूठे रचनाकार थे भारत यायवर / अनूप शुक्ला

 आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी रचनावली (पन्द्रह खंड) और फणीश्वरनाथ रेणु रचनावली (पाँच खंड) के संपादक , नामवर सिंह और रेणु के जीवनीकार , पूर्व और पश्चिम के साहित्य के गहन अध्येता , अप्रतिम शोधकर्ता तथा गजब के पढ़ाकू और लिक्खाड़ , हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार  #भारत_यायावर नहीं रहे ....

             जब तक दिल्ली नहीं छूटी थी , भारत यायावर से प्रायः ही मुलाकातें होती रहती थीं .... और साहित्य की लंबी लंबी , लगभग अंतहीन चर्चाएँ भी .... वह दिल्लीवासी नहीं थे , लेकिन लेखन - प्रकाशन के नाते दिल्ली से इतना जुड़े थे - या कहें कि इतना अधिक आते-जाते थे - कि लंबे समय तक , बहुतों की तरह हम भी यही समझते रहे कि वह जमनापार बसने वाले लेखकों में से ही एक हैं ....

           भारत यायावर अपने लेखन में जितने गंभीर थे , मित्रों के बीच उतने ही अनौपचारिक , जिंदादिल , सहज और लोकप्रिय .... अभी कुछ दिन पहले ही उनके द्वारा लिखी तथा रजा पुस्तकमाला  के अंतर्गत प्रकाशित #रेणु_एक_जीवनी का #पहला_खंड प्राप्त हुआ था .... दूसरे खंड पर वह काम कर रहे थे .... 

              अब #दूसरा_खंड तो चाहे मिल भी जाए , लेकिन भारत यायावर कभी , कहीं नहीं मिलेंगे .... न अक्षर में , न आई.टी.ओ. में , न मंडी हाउस में , न किसी गोष्ठी में , न ज्ञान प्रकाश विवेक के दफ्तर में और न ब्रजमोहन की दुकान पर ....

               अत्यन्त परिश्रमी और अपनी तरह के अनूठे रचनाकार भारत यायावर .... #अलविदा ....


                                    #अनूप_शुक्ल

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