सोमवार, 1 नवंबर 2021

जहांगीर आर्ट गैलरी / टिल्लन रिछारिया

 जहांगीर आर्ट गैलरी के गलियारे में मिले के एच आरा  ।....  कौन आरा ! ...आरा , रजा और मकबूल फिदा हुसैन की तिकड़ी ने  कैनवास पर अपने ब्रश से  रंगों के एक से एक बेमिसाल छंद रचे हैं ।


 अपने दौर में कला जगत के सरताज रहे हैं ये लोग । काला घोडा इलाके में स्थित, जहांगीर आर्ट गैलरी, कलाकारों के लिए सबसे प्रतिष्ठित आधुनिक जगह मानी जाती है। इस आर्ट गैलरी का निर्माण 1952 में किया गया था, जिसमें चार प्रदर्शनी हॉल हैं। इस बड़ी आर्ट गैलरी के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए कलाकार काफी उत्सुक रहते हैं। कई बार उन्हे सालों तक इंतजार करना पड़ता है।.

.. .आर्ट गैलरी और समोवर रेस्तरां को 1975 की बॉलीवुड फिल्म छोटी सी बात में दिखाया गया था। ...एक दोपहर ,  जहांगीर आर्ट गैलरी की दीवारों पर करीने से टंगी पेंटिंग पर आंखें टिकी हैं । जैसे होली के रंग बिरंगे गुलाल के उड़ते नज़ारों को फ्रेम में बांध दिया गया हों , एक नव यौवना की लचकी काया है , हवाओं मै वांसुरी  तैर रही है ।... चलते चलते इस पेंटिंग के पास ठिठक गया हूँ । ...बगल में खड़े एक बुजुर्ग कोहनी से मेरी बांह छूते हैं ।...कुछ पल्ले पड़ रहा है ।...हां , क्यों नही , बनाने वाले से ज्यादा । ...वो मुस्कुराए और मेरा हाथ पकड़ कर अपने साथ ले चले ।...उनके साथ एक खूबसूरत नवजवान और हैं जो जहांगीर आर्ट गैलरी में अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी  लगाना चाहते पर बुकिंग  नहीं मिल रह रही , छह महीने तक कोई गुंजाइश नहीं , बुकिंग फुल है ।.


..हम आर्टिस्ट सेंटर में है । यह  काला घोड़ा में ही जहांगीर आर्ट गैलरी के ठीक पीछे है । यहां पूरे साल साहित्य,संस्कृति,कला ,फैशन आदि की तमाम गतिविधियां चलती रहतीं हैं । ...यहां आ कर पता चलता है कि हमारा हाथ पकड़ कर जो बुजुर्गवार  हमें यहां आर्टिस्ट सेंटर में लाये हैं वे मशहूर चित्रकार आरा साहब हैं ।अपने समय के नामचीन चित्रकार । ...आरा साहब  साथ आये नवजवान से कह रहे हैं कि आप अपनी प्रदर्शनी यहां लगा लीजिये यह जगह किफायती है और आप की तारीखों के  हिसाब से उपलब्ध है । यह नवजवान साथी जो साथ आये हैं खूबसूरत , गोरे चिट्टे , स्मार्ट , फ़िल्म ऐक्टर शशि कपूर जैसे लग रहे हैं । वे रज़ामंद होते हैं और अपना काम निबटा कर चले जाते हैं । ...

अब आरा साहब मुखातिब हैं ...आप भी बनाते हैं कुछ ।...जी नहीं , मैं तो ऊपर वाले का बनाया हुआ हूं , चलता फिरता कैनवास  , जिसके एक्सप्रेशन हर पल बदलते रहते है ।...कहां के हैं ।...चित्रकूट ।...यहां क्या करते हैं ।...जर्नलिस्ट हूँ , आर्टिकिल पेंट करता हूँ कागज़ पर  ।...वाह वेरी गुड़ ।...आरा साहब ने अपने करियर की शुरुआत सामाजिक-ऐतिहासिक विषयों पर परिदृश्य और पेंटिंग से की, लेकिन वह अपने  जीवन के जीवंत और नग्न चित्रों के लिए सबसे ज्यादा जाने गए । आरा पहले समकालीन भारतीय चित्रकार थे जिन्होंने प्रकृतिवाद की सीमाओं के भीतर रहते हुए नग्न महिला पर एक विषय के रूप में ध्यान केंद्रित किया। उनके कई काम  जीवन और मानव आकृति के अध्ययन से संबंधित हैं। जबकि उन्होंने शुरू में पानी के रंग और गौचे का इस्तेमाल किया था, जहां उनके इंपैस्टो प्रभाव के उपयोग ने उन्हें अक्सर तेल चित्रों के समान बना दिया था, बाद में उन्होंने तेल पेंट के प्रयोग किया। यहाँ पतली रंजकता के उनके सफल निष्पादन ने पानी के रंगों के साथ उनके शुरुआती काम को याद किया जाता है , जैसा कि पेंटिंग ' वुमन विद फ्लावर्स '  में देखा गया था। 

आरा के काम ने फ्रांसीसी आधुनिक कलाकारों, विशेष रूप से पॉल सेज़ेन के गहरे प्रभाव को दर्शाया है ।...कृष्णाजी हौलाजी आरा को पहले समकालीन भारतीय चित्रकार के रूप में देखा जाता था , जिन्होंने एक विषय के रूप में नग्न महिला को कैनवास पर  उतारा । आरा साहब प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप का हिस्सा थे ।  यहां जहां बैठे है आरा साहब इस  आर्टिस्ट सेंटर के संस्थापक हैं ।...आरा साहब की तमाम कृतियां और उनके संघर्ष के पड़ाव जेहन में तैर रहे है । ... आरा साहब इन दिनों तमाम अंग्रेजी पत्रिकाओं और अखबारों में ' एथिक्स ऑफ न्यूडिटी ' जैसे हेडलाइंस  खूब दिख रहे हैं । क्या मानक होता है कलात्मक न्यूड और फूहड़ न्यूड  का ।...आपने बताया कि आप चित्रकूट से हो , तो आपको सती अनुसूया का वह प्रसंग तो पता होगा जब ब्रम्हा , विष्णु औए शिव उनके सतीत्व की परीक्षा लेने गए थे तब सती अनुसूया ने उन्हें अपने सत के बल से शिशु बना लिया था । ...तो जो कृतिकार अपनी कृति के माध्यम दर्शर्क को शिशुवत बना लेता है तो इसकी नग्न कलाकृति श्रेष्ठ मानकों वाली होती है नही तो वो सनसनी हो सकती है , कलाकृति नही ।...आर्टिस्ट्स सेंटर गैलरी शहर के इतिहास  की सबसे पुरानी आर्ट गैलरी  है ।  इसे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप जिसने 50 के दशक की शुरुआत में एक कला आंदोलन का नेतृत्व किया था के द्वारा शुरू किया गया था । जिसमें सुजा, रज़ा और हुसैन जैसे बड़े नाम शामिल थे। गैलरी बनने से पहले, यह बॉम्बे आर्ट सोसाइटी के लिए एक कला सैलून हुआ करता था। यह काफी व्यस्त जगह है और बहुत लोकप्रिय है । अपने चित्रों की प्रदशर्नी के लिए कलाकारों को यह जगह आसानी से मिल जाती है ।...काला घोड़ा कला संस्कृति की गतिविधियों का बड्स ठिकाना है । डिजाइनर कैफे, इंडी गैलरी और फुटपाथ कला स्टालों के साथ एक आकर्षक, रचनात्मक क्षेत्र है। जहांगीर आर्ट गैलरी और नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट समकालीन दृश्य कलाओं का प्रदर्शन करते हैं । ये जगह आप को  कला जगत की ताजी गतिविधियों से बराबर अपडेट रखती है । आप अकेले हों या समूह में आप ताज़गी से भरपूर रहते हैं ।

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