रविवार, 3 अक्तूबर 2021

भारतेन्दु हरिश्चंद्र


भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
Bharatendu Harishchandra 1976 stamp of India.jpg

भारतेन्दु

जन्म9 सितम्‍बर, 1850
वाराणसीउत्तर प्रदेशभारत
मृत्यु6 जनवरी, 1885
वाराणसीउत्तर प्रदेशभारत
व्यवसायकवि लेखक,रंगकर्मी, देशहितचिन्तक पत्रकार
राष्ट्रीयताभारतीय
अवधि/कालआधुनिक काल
विधानाटक, काव्यकृतियाँ, अनुवाद, निबन्ध संग्रह
विषयआधुनिक हिन्दी साहित्य
उल्लेखनीय कार्यअन्धेर नगरीभारत दुर्दशा
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

Bharatendu Harishchandra 1976 stamp of India.jpg
भारतेन्दु
जन्म9 सितम्‍बर, 1850
वाराणसीउत्तर प्रदेशभारत
मृत्यु6 जनवरी, 1885
वाराणसीउत्तर प्रदेशभारत
व्यवसायकवि लेखक,रंगकर्मी, देशहितचिन्तक पत्रकार
राष्ट्रीयताभारतीय
अवधि/कालआधुनिक काल
विधानाटक, काव्यकृतियाँ, अनुवाद, निबन्ध संग्रह
विषयआधुनिक हिन्दी साहित्य
उल्लेखनीय कार्यअन्धेर नगरीभारत दुर्दशा

भारतेन्दु बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। हिन्दी पत्रकारितानाटक और काव्य के क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान रहा। हिन्दी में नाटकों का प्रारम्भ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से माना जाता है। भारतेन्दु के नाटक लिखने की शुरुआत बंगला के विद्यासुन्दर (1867) नाटक के अनुवाद से होती है। यद्यपि नाटक उनके पहले भी लिखे जाते रहे किन्तु नियमित रूप से खड़ीबोली में अनेक नाटक लिखकर भारतेन्दु ने ही हिन्दी नाटक की नींव को सुदृढ़ बनाया।[1] उन्होंने 'हरिश्चन्द्र चन्द्रिका', 'कविवचनसुधा' और 'बाला बोधिनी' पत्रिकाओं का संपादन भी किया। वे एक उत्कृष्ट कवि, सशक्त व्यंग्यकार, सफल नाटककार, जागरूक पत्रकार तथा ओजस्वी गद्यकार थे। इसके अलावा वे लेखक, कवि, सम्पादक, निबन्धकार, एवं कुशल वक्ता भी थे।[2] भारतेन्दु जी ने मात्र चौंतीस वर्ष की अल्पायु में ही विशाल साहित्य की रचना की। उन्होंने मात्रा और गुणवत्ता की दृष्टि से इतना लिखा और इतनी दिशाओं में काम किया कि उनका समूचा रचनाकर्म पथदर्शक बन गया।

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